जाने क्या हुआ जब कृष्ण संग द्वारका नगरी पहुंची राधा रानी?

"श्री कृष्ण की प्रेयषी राधा वृन्दावन में रही और कृष्ण के वियोग में 100 साल रही उनका कृष्ण से विवाह नहीं हुआ ये सब आपने सुना होगा अब जाने कृष्ण के राजगुरु की बताई"

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राधा कृष्ण के धरती पर प्रेम के बारे में आप कितना जानते है? ज्यादातर लोग ये ही जानते है की उनका प्यार बचपन का था और श्री कृष्ण के मथुरा चले जाने के बाद वियोग में ही जिंदगी बीती बिना शादी का ये प्यार था जिसने आत्माओ के प्रेम की पराकाष्ठा दिखाई थी.

लेकिन ये कहानी सिर्फ मुख्य मुख्य इतिहास (महाभारत और श्री मद भागवत महापुराण) जो की संक्षिप्त है में ये ही (इतना ही) बताया गया है. लेकिन श्री ब्रह्मा वैवर्त पुराण में इससे भी ज्यादा बताया गया है जिसके अनुसार राधा जी कृष्ण से उम्र में 5 साल से बड़ी थी.

नन्द जी से कृष्ण को मांग कर वो गोद में उठाकर ले गई थी जिसके बाद कृष्ण ने अपना असली स्वरुप धारण किया, ब्रह्मा जी आये और उन्होंने दोनों का विवाह करवाया. इसके बाद श्री कृष्ण को राधा जी उनके घर छोड़ आई (बाल रूप को) और उसके बाद वृन्दावन में नित रास (नृत्य) का आयोजन होने लगा था.

श्री कृष्ण मथुरा गए तो राधा जी ने अपनी छाया अपने घर छोड़ी और खुद निधिवन में ही रहने लगी थी, लेकिन 100 वर्षो के श्राप के पुरे होने के बाद....


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100 वर्षो का राधा जी ने वियोग जरूर सहा लेकिन बिच में एक बार उद्धव जी के साथ कृष्ण सभी गोपियों से मिलने आये थे और सभी को सांत्वना दी थी. अपने कर्म कार्य पुरे हो जाने पर वो अपने साथ राधा जी को द्वारका नगरी ले गए थे जंहा राधा कृष्ण का श्री कृष्ण की 16108 रानियों और पट्ट रानियों ने भव्य स्वागत किया था.

तब पुनः राधा कृष्ण का द्वारका में भी विवाह हुआ था उसके बाद श्री कृष्ण राधा को लेकर वृन्दावन गए जंहा यशोधा जी से दोनों बाल रूप में मिले. तब यशोदा ने दोनों की आरती उतारकर उनके सभी संस्कार करवाए, तब सभी गोपिया राधा रंग वैकुण्ठ चली गई और सभी गोप भी.

अनंत कृष्ण द्वारका लौटे और वंहा से प्रभास क्षेत्र में अपनी अंतिम यात्रा की....

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