गंगा छूने से तो नर्मदा जल देखने भर से ही कर देता है पवित्र, जाने इसका माहात्म्य

"हर हर गंगे कह हम रोज स्नान करते है और इसे पापनाशिनी गंगा कहते है लेकिन क्या आप जानते है की गंगा जल को छूने से तो नर्मदा को तो देखने भर से ही मिलता है वही फल तो"

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गंगा नदी की महिमा आप साधुओ और गुरुओ से सुनते आये है लेकिन अब आप ये सुन कर चौंक गए होंगे की नर्मदा नहीं दर्शन मात्र से ही पवित्र करने वाली है. गंगा देव नदी है जो की भागीरथी प्रयासों से शिव के जटाओ से होते हुए हरिद्वार से शुरू होकर समुद्र के रास्ते पाताल में पहुँचती है.

लगभग सभी भारतीय अपने निज जनो की मृत्यु के बाद उनकी अस्थिया हरिद्वार में ही बनाने जाते है और ऐसी ही मान्यता रही है. राजा सगर के पुत्रो का उद्धार गंगा नदी के जल में मिलकर ही हुआ था और इसी मान्यता के चलते ही हम सभी ऐसा करते आये है लेकिन सिर्फ हरिद्वार में ही करे ऐसा जरुरी नहीं.

गंगा नदियों में श्रेष्ठ है लेकिन तभी जब आप उसे छुए लेकिन नर्मदा नदी के बारे में ऐसा कहा गया है की उसे देखने मात्र सही आप पवित्र हो जाते है छूना तो दूर की बात. आखिर क्या है इसके पीछे का रहस्य क्यों है नर्मदा नदी का इतना महत्त्व जाने उसके उद्गम स्थान से भी जुड़ा महत्त्व...


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अमरकंटक के अमरकंटक पठार से नर्मदा कुंड से (ऊपर चित्र में) निकलने वाली नर्मदा भारत की 7 पवित्र नदियों में से एक है. ऐसी मान्यता है की लोगो के पापो से मैली हुई गंगा खुद नर्मदा में नहाने आती है, ऐसी मान्यता है की योग निंद्रा में बैठे शिव जी के पसीने ने नर्मदा कुंड में गिर कर नर्मदा नदी का रूप लिया था.

नर्मदा को शंकरी भी कहा जाता है और इसे शिव पुत्री भी कहा जाता है, नर्मदा बहकर जब महाकाल की नगरी उज्जैन में पहुँचती है तो इसका महातम्य और बढ़ जाता है. ये ही (शायद) कारण है की नर्मदा को देखते ही पुण्य मिलता है जबकि गंगा को छूने से, वैसे गोमती नदी के उच्चारण मात्र से ही ऐसा ही पुण्य मिलता है ऐसा हमने सुन रखा है.

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