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जाने, 7 पुरियो की भूमि में ऐसा क्या है जो यंहा मरने वाले को मिलता है मोक्ष?

"क!शी, अयोध्या, मधुरा, हरिद्वार, कांचीपुरम, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका ये सप्तपुरिया यानि सात नगर कहे गए है! प्राचीन भारत में ये मान्यता रही थी की इन सात नगरों"
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आदि गुरु शंकराचार्य ने ही चार धाम यात्रा शुरू कर वाई थी और कुम्भ स्नान का भी उन्होए ही शुरू करवाया था कल्प वास उन्होंने ही शाश्त्रो के जहां अध्ययन से ये तय किया की 7 नगरीय ऐसी है जिनमे रह कर मौत को पाने वाला मोक्ष को प्राप्त होता है उन्ही नागरियो को हम सप्त पुरिया कहते है.

क!शी, अयोध्या, मधुरा, हरिद्वार, कांचीपुरम, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका ये सप्तपुरिया यानि सात नगर कहे गए है! अपने यंहा से जुडी हुई कई कथाये सुनी होगी लेकिन आज हम बता रहे है उस क्षेत्र की भूमि की वो विशेषताएं जिनके चलते भौगोलिक दृष्टि से ये स्थान है मोक्ष की नगरिया.

शुरुवात करे काशी से जिसकी रक्षा वरुणा और असी नदी करती है इसलिए इसे वाराणसी भी कहते है, काशी शिवलोक का ही टुकड़ा है जिसका नाम आनंद वन था जो प्रलय में भी नष्ट नहीं होता है. इस स्थान को शिव नहीं छोड़ते है इसलिए ये अविमुक्त क्षेत्र कहलाता है और इसी लिए शिव के निवास में ही मरने वाले को मिलता है मोक्ष.

जाने बाकि 6 नागरियो का भी भौगोलिक महत्त्व...


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सात मोक्ष के नगरों में शुमार कांचीपुरम के बारे में आध्यात्मिक क्या कथा है वो नहीं पता होगी, लेकिन जो थड़ा बहुत पता चला है वो कमाल है, वो जाने. कांचीपुरम में कांची का अर्थ होता है करधनी यानी की नाभि, ये स्थान पृथ्वी की नाभि है. "का" का अर्थ है ब्रह्मा और अंची (स्थानीय भाषा में) यानी विष्णु पूजा अर्थात जंहा ब्रह्मा जी विष्णु जी की पूजा करते है वो स्थान. 

इस स्थान पर त्रिदेव वास करते है इसलिए ये स्थान मोक्ष की नगरी है...

इसमें 108 शिव और 18 विष्णु मंदिर है, नगर की तीन दिशाओ में क्रमश अलग अलग ब्रह्मा विष्णु महेश के मंदिर क्षेत्र है, इसके अलावा यंहा कामाक्षी का मंदिर है जो की देवी दुर्गा का स्थान है, कहा जाता है की कांचीपुरम ही वो स्थान है जंहा गौरी ने शिव की पूजा की थी और पति रूप में उन्हें पाया था, रामेश्वरम भी यंहा से ज्यादा दूर नहीं है!

इसलिए इस स्थान पर मरने वाले को मोक्ष मिलता है और ये सप्तपुरी में से एक है...


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कपिल मुनि जंहा तपस्या कर रहे थे और जंहा उनके उठने भर से ही जिनकी साँसों से राजा सागर के 60000 पुत्र भस्म हो गए थे वो स्थान हरिद्वार ही था. गोलोक की नदी विरजा के 7 पुत्र समुद्र उन्ही सागर के नाम से सागर कहलाते थे सभी समुद्रो को सागर पुत्रो ने ही खोदा था यज्ञ का अश्व खोजने के लिए.

कई पीढ़ियों के प्रयासों के बाद भगीरथ यंहा गंगा ले आये और अपने पूर्वजो का उद्धार करवाया था इसलिए इस स्थान को हर की पौड़ी यानि वैकुण्ठ की सीढ़ी कहा जाता है. इस स्थान पर जिसके पूर्वजो की अस्थिया प्रवाहित हो जाए उन्हें भी इन्ही मृत्यु का फल यानी मोक्ष मिलता है.

ये है हरिद्वार क्षेत्र की महिमा जो देती है मोक्ष....


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महाकाल की नगरी उज्जैन जो की अवंतिका नाम से प्रसिद्द थी सिर्फ ज्योतिर्लिंग के लिए ही मोक्ष की नगरी नहीं है बल्कि इसका भी भौगोलिक कारण है. उज्जैन ही त्रिपुरारी शिव द्वारा ध्वस्त किया गया त्रिपुर नगर है जिसका ढांचा बच गया था और पृथ्वी पर स्थापित किया गया था.

नर्मदा के उद्गम स्थान के चलते भी ये स्थान पवित्र है, गंगा स्पर्श से पाप नाश करती है जबकि नर्मदा के दर्शन मात्र से ही सभी पाप समाप्त हो जाते है. शिव जी ने यंहा शक्ति के साथ वास किया था और आज भी करते है इसलिए यंहा मृत्यु से मिलता है मोक्ष...


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श्रीराम के जन्म स्थान के कारण अयोध्या नगरी मोक्ष की नगरी बन गई श्री राम भगवान् विष्णु के पूर्णावतार थे और उन्होंने यंहा जन्म लिया इसलिए इस स्थान को मोक्ष की नगरी का दर्जा मिला है. मथुरा का 84 कोस श्री कृष्ण के गोलोक का ही टुकड़ा है इसलिए ये मोक्ष देने वाली नगरी है.

वंही सातवा द्वारका नगर भी विष्णु जी के वैकुण्ठ के 100 कोस का हिस्सा है इसलिए ये स्थान भी मोक्ष दायी है जिसमे गिरनार पर्वत श्रंखला से बेत द्वारका तक शामिल है. इसलिए कभी किसी रिश्तेदार को डॉक्टर उत्तर देदे तो उसे तुरंत निकटस्थ सप्तपुरियों में ले जाए और उनको मोक्ष दिलवाये.

किसी के मोक्ष में सहायक भी मोक्ष का हक़दार बन जाता है...जय श्री हरी 
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