होली का त्यौहार क्यों कबसे और कैसे हुआ शुरू, जाने गौरवशाली सनातन इतिहास से....

"कोई कहता है राधा कृष्ण ने होली शुरू की तो कोई कहता है की होली में हुड़दंग क्यों तो कोई प्रह्लाद जी से होली शुरू होने की बात कहता है, जाने शाश्त्र सम्मत जानकारी.."

image sources : mutterfly

होली का त्यौहार क्यों कब से कैसे मनाया जाने लगा, जाने और गर्व करे अपनी विरासत पर...

होलिका दहन कब से शुरू हुआ इसमें सभी का मत एक ही है, फाल्गुन पूर्णिमा के दिन ही प्रह्लाद जी को मारने की कोशिश के विफल होने पर पृथ्वी वासियो ने ये परम्परा शुरू की थी. हां लेकिन भारतीय इतिहास जिसे हम शाश्त्र के नाम से जानते है के अनुसार ये करीब एक अरब वर्ष पहले पहली बार मनाया गया था!

होली पर धुलंडी को रंग कैसे शुरू हुआ इस बात पर सभी एक मत नहीं है, ये परंपरा भी 50 लाख वर्षो से ज्यादा पुरानी है. असल में शिव और गौरी (सती) का विवाह होली के दिन हुआ था. 7 फेरो के बाद सगे सम्बन्धी (देवता और दक्ष के परिवार के लोगो ने) रंग खेला था जैसे विवाह के बाद हम लोग सगे सम्बन्धी रंग खेलते है और तभी से ये रंग महोत्स्व भी शुरू हो गया.

शिव और सती दक्ष के महल में चले गए थे और शिव रनिवास में ही रहे थे! आपको शायद ज्ञात हो की राजस्थान में अगले दिन से ही गौर ईश्वर (सती शिव) की हर घर में कुंवाईर और ब्याही गई कन्याओ द्वारा पूजा होती है! विवाह के बाद शिव ने अपनी पत्नी के साथ दक्ष के घर में ही अठारह दिनों तक निवास किया था, पूरी बारात भी उतने ही दिन उनके साथ रुकी थी! 

इतने दिनों तक रोज घर की औरतो ने शिव और गौरी की सुबह शाम पूजा की थी, अठारवे दिन शिव और शक्ति की विदाई हुई और वो कैलाश पर चले गए थे!


image sources : gettyimage

आपको शायद जानकार आश्चर्य होगा की अठारवे दिन जो तीज महोत्स्व होता है वही शिव पार्वती का विदाई समारोह है जो आज भी लोग मनाते है! राजस्थान में इस त्यौहार की खास धूम रहती है, लोगो की ये आस्था है की शिव गौरी का विवाह कर अठारह दिन उन्हें घर में रख कर उनकी पूजा कर और गणगौर के दिन विदाई करने से लड़कियों को योग्य वर प्राप्त होता है!

होली पर हुड़दंग करने की परम्परा भगवान् राम के पूर्वज रघु ने शुरू की थी करीब 18 लाख वर्षो पूर्व उसके पहले होली पर हुड़दंग नहीं होता था. रावण के नाना माली की बहिन जिसका नाम शायद धूलि था नवयुवको को मार देती थी, उससे बचने के लिए लकड़ी की तलवारो को लेकर युवाओ को हुड़दंग मचाने की सलाह दी थी वशिष्ठ ऋषि ने.

उस हुड़दंग से वो राक्षसी घबरा जाती थी और अनंत इस हुड़दंग के प्रभाव से वो मारी गई इसलिए इस दिन को धुलंडी भी कहा जाता है और तभी से हुड़दंग की परम्परा बन गई. अभी भी ये ही मान्यता चली आ रही है की होली पर हुड़दंग करने से टीनएजर्स बच्चो की रक्षा होती है.

तो अपने बच्चो को होली पर हुड़दंग की प्रेरणा दे और गर्व करे अपने गौरवशाली इतिहास पे 

Share This Article:

facebook twitter google