भांडीर वन : इस स्थान पर हुआ था राधा कृष्ण का विवाह, जाने उस बरसाती रात का रहस्य

"जब इतना प्यार था तो शादी क्यों नहीं की राधा कृष्ण ने? इसका जवाब भी है जनाब बस जरुरत है शाश्त्रो के अध्ययन की. जाने हमारे साथ श्री कृष्ण राधा विवाह की बरसरि रात"

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ब्रिज क्षेत्र के 137 अद्भुद वन क्षेत्रो में से एक है भांडीर वन जिसकी की पहचान उस स्थान से की जाती है जंहा प्रलम्बासुर नाम के दैत्य ने कुछ कृष्ण बाल सखाओ को बंदी बना लिया था. श्री कृष्ण ने उस असुर का वध करके अपने मित्रो को छुड़ाया था और उनके प्राण बचाने थे.

एक और असुर ने यंहा आग लगाकर गई गौओ और कृष्ण सखाओ समेत कृष्ण बलराम को भी जिन्दा जलाना चाहा था, तब श्री कृष्ण ने उसे अग्नि समेत निगल लिया था. इसी इतिहास को देखते हुए अब यंहा के निवासियों ने इस क्षेत्रो को सीमाओं में बाँदकर सुरक्षित कर एक स्थान का रूप दे दिया है.

ऐसा करके वो इस स्थान को तीर्थ रूप देकर इसे बचाने एक प्रयास कर रहा है लेकिन आपको ये भी जानकार आश्चर्य होगा की वंही राधा और श्री कृष्ण का गुप्तरुप से विवाह हुआ था. ब्रह्मा वैवर्त पुराण और गर्ग संहिता में इस स्थान का वर्णन है जो की भांडीर वन के नाम से मशहूर है.

जाने दिव्य भांडीर वन के बारे में....


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काफी समय से तिरष्कृत इस क्षेत्र को अब एक पुजारी मिल गया है जो इसका जीर्णोद्धार कर रहा है, वट, पीपल, पीलू, कदम्ब,  पसंदु और खड़िया समेत अनेक दिव्या वृक्षों से ये वन भरपूर है. यंहा मोरो की भरमार है और बहुत से पक्षियों का भी आसरा हो गया है इस स्थान से.


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ये स्थान यमुना नदी से भी ढाई किलोमीटर दूर है, अब सरकार ने भी इस्पे ध्यान दिया है और इस स्थान का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है.


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इन्ही एक कूप भी है जिसका इस्तेमाल गोपिया किया करती थी रास के दौरान, "न नौ मन तेल आएगा न राधा नाचेगी" कहावत आपने सुनी होगी लेकिन इसका अर्थ नहीं समझे भोगने.

9 मन तेल यानी लगभग 400 लीटर तेल लगता था (तिल्लो का) तब जाकर रात भर रास लीला के लिए प्रकाश की व्यवस्था होती थी. इसके लिए कहा जाता है की न नौ मन तेल आएगा और न ही राधा नाचेगी....हर हर महादेव  

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