नन्द और वृषभानु नहीं थे राधा कृष्ण के पिताओ के नाम, ये एक उपाधि है! जाने असली नाम?

"गोकुल में कुछ 9 नन्द, 6 वृषभानु कई उपनन्द और 2 नंदराय थे गोपालो और गोपिकाओ की संख्या तो अरबो में थी, ये जानकर ही आप चौंक गए होंगे. जाने राधा कृष्ण के पिताओ का.."

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बरसो से टीवी और कथाओ में सभी जगह सुनते आ रहे है की श्री कृष्ण के पालक पिता का नाम नन्द था और राधा रानी के पिता का नाम वृषभानु था. लेकिन अगर आज हम आपसे कहे की ये उनके नाम नहीं बल्कि उपमा है तो आपको कैसा लगेगा? जैसा भी लगे हम अपने स्थान पर सही है.

इसलिए कहते है की धर्म को खुद जानो खुद समझो और फिर अपना कोई पक्का दृष्टिकोण तय करो किसी के बताये दृष्टिकोण पर नहीं. श्री कृष्ण के वृष्णिवंश यादवो के राज पुरोहित गर्गाचार्य जी थे जिन्होंने उन्हें करीब से देखा और समझा था, महाभारत में संक्षिप्त कथा थी कृष्ण लीला की तो उन्होंने अपने शब्दों में विस्तार से लिखी है कथा.

कंस की शक्तियों के बारे में हमने अपने पीछे आध्यात्मिक ब्लॉग में बताया था जिन्हे जान आप हतप्रद होंगे अब जाने नन्द और वृषभानु के असली नाम. गर्ग संहिता के हिसाब से जिस व्यक्ति का जीवन गौसेवा में समर्पित हो और गौ से ही जिसकी जीवनी चलती हो उसे गोपाल कहते है.

ऐसे गोपाल और गोपिकाओ की संख्या वृज में अरबो की संख्या में थी तब....जाने और विस्तार से...


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ये सभी गोप और गोपिकाये पूर्व जन्मो के वरदानो से गोकुल में अवतरित हुए थे उनमे से लगभग 95% ये वरदान श्री राम ने दिए थे. अयोध्या में रहने वाली सभी औरतो जो राम जी के समकक्ष रही थी उनपे रीझि रहती थी उन्हें राम जी ने वरदान दिया था कृष्णावतार में उनकी तमन्ना पूरी करने की.

श्री कृष्ण के पालक पिता का नाम द्रोण था जबकि राधा जी के पिता का नाम सुचन्द्र, 9 लाख गौ के स्वामी को नन्द, 10 लाख गौ के स्वामी को वृषभानु और 5 लाख गायो के स्वामी को उपनन्द कहते है. 1 करोड़ गायो के अधिपति को नंदराज और 10 करोड़ गायो के स्वामी को वृषभानुवर कहते है.

भले ही राजा थे लेकिन वृष्णि क्षत्रिय नहीं थे गोपाल थे यदु के वंशी में होने के चलते यादव कहलाये लेकिन आज जो यादव है वो वृष्णिवंशी नहीं है. गोकुल में उस समय जो जन्मे हुए थे चाहे गाय और जानवर ही क्यों न हो सभी पूर्व जन्मो के वरदानो से गोकुल में कृष्ण के समकालीन जन्मे थे.

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