रावण से भी ज्यादा शक्तिशाली था कंस, सवालाख किलो का उठा लिया था धनुष! जाने उसकी ताकत

"टीवी की श्री कृष्णा में अपने कृष्ण के मामा कंस को एक क्रूर शासक के रूप में ही देखा होगा उसका पराक्रम नहीं देखा होगा! जाने उसका अपार बल जो रावण से भी अधिक था...."

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रावण को मारने के लिए श्री राम को कई दिन युद्ध करना पड़ा था इस दौरान दो बार राम जी तो 4 बार लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे. करोडो वानरों की भी मौत हो गई थी (हालाँकि उन्हें इंद्र ने पुनः जीवन दान दे दिया था) तब जाकर कंही अंत में रावण का वध हुआ था.

इसपे हनुमान जी और वानरों में भी कई वीरो की सहायता से ही रावण की सेना का संघार हुआ था भले ही बड़े बड़े राक्षस राम लखन ने मारे थे लेकिन वानर वीरो ने भी कई राक्षस मारे थे. इन सब को देखते हुए अगर आपको लगता है की कंस तो बड़ा कमजोर था तभी कृष्ण जो की 11 साल के थे ने उसे आसानी से मार दिया था तो आप गलत है.

तब पर श्री कृष्णा हो या महाभारत सभी में कृष्ण लीला तो दिखाई है लेकिन कंस का पराक्रम बहुत कम ही दिखाया गया है. श्री कृष्ण के राज पुरोहित गर्गाचार्य ने जो गर्ग संहिता लिखी है उसमे उन्होंने कंस के बल का वर्णन किया है जिसे जान आप भी कहेंगे की वो रावण से ज्यादा बलशाली था.

जाने उसका बल...


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वत्सासुर, पूतना, तृणावर्त, अघासुर, बकासुर (पूतना का भाई). अरिष्ठासुर, केशी, व्योमासुर, शकटासुर इन सभी असुरो को भगवान् कृष्ण ने बचपन में ही मार दिया था. लेकिन आप जानकार चौंक जायेंगे की इस सभी को कंस ने अपनी दिग्गविजय यात्रा में परास्त कर अपना गुलाम बना लिया था, तभी प्राण दान दिया इनको नहीं तो ये उसके हाथो भी मारे जाते.

जरासंध का हाथी कुवलयापीड़ जिसमे 1000 हाथियों का बल था जरासंध की दिग्गविजय के समय उसके साथ था, मथुरा नगरी के पास जब उसने शिविर लगाया तो वो हाथी कंस की नगरी में घुस गया. कंस तब मल्ल युद्ध में व्यस्त था तब कंस निहत्था ही उस हाथी से भीड़ गया और उसे उठाकर कंस के शिविर में फेंक दिया.

हाथी फिर भी मरा नहीं लेकिन ये पराक्रम देख उसने अपनी दो बेटियों कंस से ब्याहकर उससे संधि कर ली.

परशुराम जी से भी टकरा गया था कंस जाने पूरी कथा....


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कंस ने अपने काका देवक की बेटी देवकी के विवाह के पूर्व ही दिग्गविजय की यात्रा शुरू की थी जिस दौरान उसने सभी उपलब्धिया हासिल की थी. इसी दौरान वो महेंद्र पर्वत (वर्तमान ओडिशा में) पहुंचा और उस पर्वत पर परशुराम जी तपस्या कर रहे है ये जान उसे वैसे ही उठा लिया जैसे रावण ने हिमालय उठा लिया था.

तब परशुराम जी कुपित हो गए तो कंस ने उनकी परिक्रमा कर उन्हें प्रणाम कर उनकी स्तुति की और कहा में क्षत्रिय नहीं हु. तब भी परशुराम का क्रोध शांत नहीं हुआ और उसे भगवान् विष्णु का धनुष दिखाते हुए कहा की ये 120000 किलो का है अगर तुमने उसे उठा लिया तो में तुम्हे माफ़ कर ये धनुष भी तुम्हे दे दूंगा.

कंस ने सहसा उस धनुष का उठा लिया और उसकी प्रत्यंचा भी कर डाली तो परशुराम जी प्रसन्न हुए और उसे वो धनुष दे दिया, साथ ही ये भी कहा की जो ये धनुष तोड़ेगा वो ही तुम्हारा अंत करने में सक्षम होगा. 

चाणूर और मुष्टिक कौन थे कैसे बने कंस के सेवक जाने????


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कंस मल्ल युद्ध का बड़ा शौकीन था उसके बराबर मथुरा में कोई पहलवान भी नहीं था, एक दिन उसे पता चला की पड़ौसी देश के राजा जो की पांच भाई थे वो सभी मल्ल्युद्ध में पारंगत थे. कंस उनके राज्य में गया और उन्हें ललकारा और कहा की अगर तुम जीते तो में तुम्हारा सेवक और में जीता तो तुम मेरे सेवक.

तब कंस ने एक एक कर के पांचो भाइयो को मल्ल युद्ध में हरा दिया और उनमे से मुष्टिक और चाणूर को अपने साथ मथुरा ले आया जिनसे बाद में उसने कृष्ण बलराम को मरवाना चाहा था. लेकिन कृष्ण बलराम जब मथुरा आये तो उन्होंने विष्णु धनुष भी तोडा जरासंध के उस हाथी को भी मारा और अंत में इन दो पहलवानो के बाद कंस को भी.

जैसे तैराक पानी में ही डूबता है वैसे कंस को भी उसके पसंदीदा मल्ल युद्ध में ही परास्त कर कृष्ण ने उसका संघार किया.

अगर ये जानकारी आपको नहीं थी तो पोस्ट शेयर जरूर करे और जानकारी चाहिए तो गर्ग संहिता की किताब घर ले आये गीता प्रेस में उपलब्ध.

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