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आखिर वेदव्यास जी ने क्यों कुछ नहीं लिखा अपने शिष्य भगवान् बुद्ध के बारे में कुछ, जाने

"भगवान् (अंशावतार) कृष्ण द्वैपायन (वेदव्यास जी) ने वेद को पहले 4 भागो में विभक्त किया (पांचवा वेद आयुर्वेद) उसके बाद उन्होंने उन चार वेदो को 18 पुराणों में बदला"
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भगवान् विष्णु के अब तक हो चुके 24 अवतारों (9 प्रमुख और बाकि अंशावतार जिनमे व्यास जी भी शामिल है) में से एक श्री कृष्ण द्वैपायन जी महाराज का नाम तो हर किसी ने सुन रखा है. वो अब वेदव्यास के नाम से प्रसिद्द है, असल में पहले एक ही वेद था जिसे इन्ही ने 4 भागो में विभक्त किया.

उनका उद्देश्य इसका सरलीकरण था ताकि कलियुग में लोग इन्हे समझे के जीवन में उतार सके, लेकिन जल्द ही उन्हें समझ आ गया की ये काफी मुश्किल है. बाद में उन्होंने 4 वेदो को (पांचवा आयुर्वेद) 18 पुराणों में विभक्त किया इसके अलावा कई उपनिषद और संहिताए भी उन्ही द्वारा विभक्त की गई है.

हालाँकि फिर भी जल्द ही (5000 सालो में) ये सभी लुप्त होने वाली है, इसके अलावा उन्होंने महाभारत ग्रन्थ भी लिखा है. पुराणों में उन्होंने भगवान् के इस कल्प में हो चुके और होने वाले अवतारों के बारे में लिखा है कल्कि के विषय में भी चर्चा है लेकिन फिर उन्होंने भगवान् बुद्ध जो की उनके ही चेले थे के बारे में कुछ खास क्यों नहीं लिखा.

जाने आखिर क्या था कारण.....


image sources : amarchitrakatha

असल में वेदव्यास जी ने जब 5200 साल पहले ये सभी वेद, उपनिषद पुराण आदि लिखे तो इसमें भविष्य में होने वाली घटनाओ के बारे में संक्षिप्त में ही लिखा. ये ही कारण था की उन्होंने कल्कि अवतार के बारे में तो उनके जन्म के नक्षत्र और समय आदि बता दिए लेकिन जल्द होने वाले बुद्ध अवतार के बारे में कुछ ख़ास नहीं लिखा.

हालाँकि मतस्य पुराण में उन्होंने बताया की राजा राम के पुत्र लव के वंश में ही आगे जाकर उनका जन्म होगा और वो ही बुद्ध के गुरु बनेंगे. उन्होंने ही बुद्ध को आध्यात्मिक ज्ञान का प्रवचन किया था और शायद उन्ही की प्रेरणा से भगवान् बुद्ध ने बचपन में ही सन्यास ले लिया था.

हां, वाल्मीकि जी ने जरूर आगे होने वाले रामावतार के बारे में उनके जन्म से पहले ही सब कुछ काफी विस्तार से लिख दिया था. शायद इसीलिए वाल्मीकि और तुलसी रामायण में काफी विरोधभास है.... 
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