कुरान, बाइबल और भविष्य पुराण में एकसा ही लिखा है 2000 साल का इतिहास! पढ़कर नफरत होगी दूर

"आपको शायद यकीं न हो लेकिन दुनिया में दूसरे धर्मो के बनने से पहले ही उसके भविष्य की कथा लिखी जा चुकी थी, वो कथा लिखी है वेदव्यास कृत भविष्य पुराण में. जाने इसे.."

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आज दुनिया भर में एक दूसरे के धर्म के प्रति लोगो में नफरत है, कोई पैसे की लालच या सेवा से अपने धर्म का प्रचार कर धर्म परिवर्तन करवा रहा है. तो कोई बल छल के प्रयोग से अपने धर्म का प्रचार कर रहा है, संख्या बढ़ाकर अपने धर्म को श्रेष्ठ साबित करने की कोशिशे हो रही है.

ऐसे में जो धर्मवलम्बी ऐसा नहीं भी कर रहे है उनमे गर्म खून वालो में भी इस बार के चलते दूसरे धर्म के प्रति असम्मान की स्तिथि है. दुनिया में इस्लामिक आतंकवाद जैसा कुछ भी नहीं था लेकिन ऐसा बताया जाता है की अमेरिका ने अपने हथियारों की बिक्री बढ़ाएं के लिए इसकी उपज की थी जो आज दुनिया के लिए संकट है.

खुद अमेरिका इससे त्रस्त है, ये तो कुछ दशकों पहले का इतिहास है हालाँकि सदियों पहले भारत में विदेशी अक्रान्ताओ ने धर्म परिवर्तन और मंदिर तोड़कर इसकी शुरुवात कर दी थी. लेकिन इसके बावजूद आप अगर 2000 साल पहले का धार्मिक इतिहास जान ले तो धर्म के नाम पर आपकी नफरत ख़त्म या कम हो जाएगी.

दुनिया के तीन प्रमुख धर्मो (संख्या के हिसाब से) में एक ही लिखा है ईसाइयत और इस्लाम का इतिहास....


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ईसाई धर्म की स्थापना आज से लगभग 2019 साल पहले ईसा मसीह ने की थी, आपको ये जानकार आश्चर्य होगा की कुरान में भी ईसा की माँ मरियम के बारे में जिक्र है. मुस्लिम ईसा मसीह को भी अल्लाह का पैगम्बर मानते है हालाँकि वो सर्वोच्च मान्यता उन्हें नहीं बल्कि मोहम्मद साब को देते है.  

ऐसे ही बाइबल के हिसाब से इसा मसीह का जन्म वर्जिन मेर्री मरियम से हुआ है, ईसाई सूर्य को अपना ईश्वर मानते है और यीशु की ही राज चलते है. अब बात करे सनातन की मान्यता की तो भविष्य पुराण में राजा विक्रमादित्य के वंशजो राजा शील वाहन और राजा भोज के वृतांत है.

यीशु और मुहम्मद से इन विक्रमादित्य वंशजो के संवाद का वृतांत भविष्य पुराण में लिखा है और वो हूबहू वैसा ही जैसा की बाइबल में बताया है. मतलब मजहब नफरत नहीं सिखाते और अपने आप से जुड़े है लेकिन मजहब को धंधा बनाने वालो ने ही ये नफरत की खेती शुरू की थी.

अगर ऐसा नहीं होता तो सोचिये, लूटमार करने आये बाबर औरंगजेब तैमूर आदि को हिन्दू धर्म के लोगो को अपने धर्म में परिवर्तित करने और मंदिरो को तोड़ने की क्या आवश्यकता थी?

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