84 लाख योनिया जरूर है लेकिन उन सबमे से नहीं गुजरना पड़ता है जीवात्मा को, जाने असली फैक्ट्स....

"84 लाख जन्म लेकर मनुष्य जन्म मिलता है इसे यु ही न गवाए, तो क्या सच में इतने जन्म लेने पड़ते है. लेकिन भारत का परिवत्र ग्रन्थ भरत संहिता जिसे हम महाभारत के नामसे "

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"लख चौरासी में भरमायो बड़े भाग से नर तन पायो...." यानी चौरासी लाख यौनियो से होकर गुजरने के बाद जीवात्मा को पुनः मनुष्य जन्म मिलता है. मौत के बाद पहले पुण्य का फल स्वर्ग में भोगने मिलता है और उसके बाद उसे नर्क में पापो का फल भोगना पड़ता है.

उसके बाद भी कर्मो के अनुसार (नर्क भोगने के बाद) जीवात्मा का अलग अलग योनिया मिलती है लेकिन अगर आपको लगता है की सभी 84 लाख योनियो में से जिव को गुजरना पड़ता है तो ये गलत है. मित्र के साथ दगा करने वाला कबूतर बनता है, ऐसे ही हर तरह के कर्म के लिए अलग अलग तिर्यक योनि मिलती है.

कौन कौन से पापो के लिए नरक भोग कर कौन कौन से जन्म मिलते है इसके बारे में विस्तार में गरुड़ पुराण में बताया गया है. लेकिन 84 लाख योनियों में से प्रति को नहीं भोगना पड़ता है इसका उल्लेख वैसे तो कंही नहीं है लेकिन भीष्म पितामह जब बाण शैया पर लेटे थे तब उनके और युधिस्ठर के बिच हुए संवाद में है इसका उल्लेख.

जाने और करीब से....


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बाण शैया पर सोये भीष्म से भी युधिस्ठर ने ये ही प्रश्न पूछा था तब उन्होंने ब्राह्मणत्व को दुर्लभ बताया, कोई भी मनुष्य जो पापी है उसे अपने पापो को नरक में भोगना पड़ता है! उसके बाद उसे 1000 साल तक तिर्यक योनियों में रहना पड़ता है (घास, पेड़, किट, पशु इत्यादि.) उसके बाद उसे क्षुद्र मनुष्य के रूप में जन्म मिलता है!

क्षुद्र रूप में अगर वो सही राह पे है तो तिर्यक योनि के (तीन गुना) यानि 30000 सालो बाद वैश्य (किसान, व्यापारी, गौपालक) के घर में जन्म मिलता है! वैश्य के रूप में अगर वो सही राह पर है तो (वैश्य के साठ गुना साल) 1800000 लाख वर्षो बाद शस्त्र धारी ब्राह्मण (राज पुरोहित) के घर में जन्म मिलता है!

फिर तीन सौ साल बाद उसे जनेऊ धारी ब्राह्मण के घर जन्म मिलता है उसके बाद आखिर में उसे फिर 300 साल बाद क्षोत्रिय ब्राह्मण (त्रिकाल संध्या सहित समस्त ब्राह्मण व्रतियों पर चलने वाले घर में) के रूप जन्म मिलता है! विश्वामित्र और एक वशिहावय को ही क्षत्रिय होने पर भी उसी जन्म में ब्राह्मणत्व की प्राप्ति हुई थी!

1000 साल तिर्यक योनि में 84 लाख योनियों का सफर मुमकिन नहीं लगता है क्योंकि कछुए, सांप और बरगद/पिप्पल/वट आदि पेड़ की आयु ही 500 वर्ष होती है.

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