जिनके नाम पर पड़ा हमारे देश का नाम, आकाशवाणी ने दिया था उनके जायज होने का प्रमाण

"महाकवि कालिदास उस समय के कभी थे जब बाकि दुनिया शायद पढ़ना भी नही जानती थी ऐसे समय में उन्होंने अभिज्ञान शाकुंतलम में भरत की कहानी लिखी थी लेकिन महाभारतमे ये...."

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हमारे देश का नाम भारत है जो की महाभारत काव्य पर आधारित है महाभारत काव्य का असली नाम भारत संहिता है जिसे अब चर्चित भाषा में हम इस नाम से जानने लगे है. ये भारत असल में पांडवो के पूर्वज थे और शकुंतला के पति राजा दुष्यंत के पुत्र थे जिनसे आगे चल के कुरु वंश बढ़ा.

इन भारत के बारे में आप बहुत कम जानते होंगे, दुष्यंत और शकुंता के प्रेम विवाह जिसे तब गन्धर्व विवाह कहते थे किया था. दोनों के समागम से शकुंतला गर्भवती हुई थी, ऐसे भरत ने जन्म लिया था वो बचपन से ही इतने पराक्रमी थे की अपने बल से राक्षसों को भी मार देता है (निहत्था). 

जंगल के हिंसक पशु भी उनके सामने बिल्ली और बकरी के बच्चो के समान थे, उनके पराक्रम को देख माँ फूली नहीं समाती थी और गुरु उनके शकुंतला के पालक पिता थे. नियत समय पर शकुंतला को लगा की अब तक दुष्यंत नहीं लौटे है तो वो अपने पुत्र को लेकर दरबार में पहुंची.


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"अभिज्ञान शकुंतलम" संस्कृत के महान कवि कालिदास की रचना है, दुनिया के लोग जब ठीक से लिखना पढ़ना भी नहीं जानते थे तब भारत के इस कवी ने संस्कृत में ऐसी ऐसी रचनाये कर दी थी जो आज भी हर लहजे से सर्वोत्तम है. इस रचना में दुष्यंत शकुंतला के विरह का सुन्दर चित्रण है.

आप हम ने ये ही कहानी सुन रखी है की श्राप के चलते दुष्यंत, शकुंतला को भूल जाता है और फिर एक मच्छली के पेट से निकली अपनी अंगूठी देख कर वो उसे पहचान जाता है तब भरत का राज्याभिषेक होता है और वो भारतवर्ष का महान सम्राट बनता है.

लेकिन भरत संहिता यानि महाभारत के अनुसार दुष्यंत जानबूझ कर शकुंतला से अनजान बन रहे थे, तब जब शकुंतला लौटने लगी तो आकाशवाणी हुई जिसमे ये कहा गया की भरत दुष्यंत का ही पुत्र है. उसके बाद राजा ने कहा की में भुला नहीं था बल्कि क्षत्रिय होने के नाते ये चाहता था की शकुंतला की पवित्रता का प्रमाण स्वयं ईश्वर सभी को दे.

ऐसे एक ही कहानी के दो अलग अलग पहलु है....

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