क्या OMG फिल्म में दिए गए कांजी भाई के तर्कों के जवाब आपके पास है? नहीं है तो जाने...

"अक्षय कुमार की फिल्म OMG आई थी जो की हिट रही थी और आलोचनाओं से भी प्रे रही थी क्योंकि उसमे धर्म विशेष पर नहीं बल्कि पाखंड पर चोट टी लेकिन क्या आप फिल्म के तर्को"

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2012 में बॉलीवुड में एक हिंदी फिल्म रिलीज़ हुई थी जिसका नाम था ओह माय गॉड OMG जो की गुजरात के थिएटर में मंचन किये जाने वाले एक नाटक पर आधारित थी. उस नाटक का नाम कांजी विरुद्ध कांजी था, इस फिल्म का डायरेक्शन उमेश शुक्ल ने किया था.

फिल्म में मिथुन चक्रबोर्ती, अक्षय कुमार और परेश रावल मुख्य भूमिका में थे 20 करोड़ में बनी इस फिल्म ने 181 करोड़ रूपये कमाकर सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. इस फिल्म की दक्षिण भारत में 2 और रीमेक बन चुकी है, फिल्म के निर्माता अक्षय कुमार थे जो की कृष्ण बने थे और उन्होंने इस फिल्म को बनाने की रिस्क उठाई थी.

फिल्म धार्मिक भावनाओ को आहत करने वाली हो सकती थी इसलिए इसमें रिस्क था, लेकिन फिल्म का ऐसा कोई खास विरोध नहीं हुआ था क्योंकि फिल्म पाखंड पर चोट थी आस्था पर नहीं. लेकिन फिल्म में कांजी भाई द्वारा दिए गए तर्क लोगो को भ्रमित कर गए और काफी लोग आज भी उन तर्कों को प्रस्तुत कर आस्था से निजात पाते है.

लेकिन क्या आपको उन सवालों के जवाब पता है, जानिए???


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फिल्म में कांजी भाई ने कुछ ऐसे सवाल पूछ लिए थे जिसका जवाब शायद ही कोई आम इंसान दे पाया इसके लिए फिल्म के तर्क चल गए. लेकिन क्या आप सच में अभी भी नहीं जान पाए उन सवालों के जवाब??? जाने क्या थे वो सवाल और उनके उत्तर भी..

क्या हमें ईश्वर को पाने के लिए किसी बिचौलिये की आवश्यकता है?
क्या भगवान् नास्तिको की मदद और धर्माधिकारिओ का विरोध करते है?
क्या धर्म इंसान ने बनाया है भगवान् ने नहीं?
अगर हम पापा पापा नहीं करते तो कृष्ण कृष्ण क्यों करे?
क्या धर्म लोगो को हिंसक और पंगु बना देता है?
जब ईश्वर सर्वव्यापक है तो मंदिर में मुरित पूजा क्यों करे हम?


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पहले सवाल का जवाब, एक घडी आधी घड़ी, आधी में पुनि आध तुलसी संगत साधू की हरे कोटि अपराध..यानि साधु पुरुषो की संगत से आपके पाप कट जाते है और आप भगवान् के और निकट पहुँच जाते है. वो और बात है की आपको साधू के भेष में कोई पाखंडी मिल जाए इसका ये मतलब नहीं की ये सिद्धांत ही गलत है, आपको अपना विवेक इस्तेमाल करना होता है.

दूसरा सवाल, जी नहीं भगवान् नास्तिको की मदद नहीं करता है बल्कि ये कहते है की कोई नास्तिक भी अगर मुझमे आस्तिक हो जाए तो में उसको शरण देता हूँ क्योंकि नास्तिक से आस्तिक हुआ व्यक्ति आस्तिको की पंक्ति से तब ज्यादा आस्तिक हो जाता है इसलिए नास्तिक से आस्तिक हुए कि मदद करते है ऐसा प्रतीत होता है.

तीसरा सवाल, कोई वस्तु नहीं है जो बनाया जाए धर्म का मतलब है जीवन पद्धति जो की संतो द्वारा आचरित की गई थी. जैसे राम जी मर्यादा पुरुषोत्तम और श्री कृष्ण कर्मयोगी होकर मनुष्यो को जीने का ढंग सिखाते है वैसे ही धर्म भी उन्ही मर्यादाओ का इतिहास मात्र है जो हमें पालन करनी चाहिए.

जीवन जीने का तरीका, यानि धर्म लिखा इंसानो ने है लेकिन लिखा वो ही है जो सत्पुरुषों ने किया था...


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चौथा सवाल, पापा अपनी जिम्मेदारी अपने आप निभाते है लेकिन अगर कुछ हमें उससे ज्यादा चाहिए तो पापा पापा हम करते ही है. ऐसे ही किस्मत में जो लिखा है वो तो अपने आप मिलेगा लेकिन किस्मत से भी ज्यादा अगर चाहिए तो कृष्णा कृष्णा करना ही पड़ेगा.

पांचवा सवाल, मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना! इस्लाम में कहा लिखा है की मासूमो बच्चो और औरतो को मार दो क्योंकि वो दूसरे धर्म के है? अल्लाह के धर्म में चलते को इंसान मजबूर नहीं मजबूत होता है लेकिन जो लोग मुल्ला (पाखंडी धर्म गुरु) के इस्लाम में चलते है वो ही हिंसक या पंगु होते है.

आखिर सवाल, ईश्वर तो सर्वव्यापक है लेकिन विज्ञानं भी ये कहते है की जब तक कोई बात हमारे सामने साकार रूप से नहीं होती है तो उसके बारे में सोचना या कल्पना करना हमारे दिमाग के लिए असम्भव है. अगर मूर्तिपूजा न की जाए तो हम नास्तिक होते जायेंगे जैसा की साकार को न मानने वाले हो रहे है.

इन सवालों के आलावा भी आपके कोई सवाल है तो आप कमेंट बॉक्स में कमेंट करे....

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