हिरण्यकश्यपु के वध के बाद प्रह्लाद जी ने ले ली थी समाधि, तब असुरो ने मचाई तबाही...

"भक्त प्रह्लाद की पूरी कथा आप हम सभी ने लगभग सुन रखी है, कैसे नरसिंघ अवतार ने हिरण्यकशपु को मार के प्रह्लाद को राजा बना दिया और इंद्र को इन्द्रासन सौंप दिया. पर "

image sources : youtube

भक्त प्रह्लाद की पूरी कथा आप हम सभी ने लगभग सुन रखी है, कैसे नरसिंघ अवतार ने हिरण्यकशपु को मार के प्रह्लाद को राजा बना दिया और इंद्र को इन्द्रासन सौंप दिया. लेकिन आप ये जान कर चौंक जायेंगे की भगवान् नरसिंघ ने प्रहृलाद को राजा नहीं बनाया था.

भगवान् नरसिंघ वर्तमान पाकिस्तान स्तिथ मुल्तान शहर में खम्भा फाड़ के प्रकट हुए थे जो की तब पृथ्वी पर ही रहे थे, शरद उपनिषद में भगवान् शिव के शरदावतार से उनके परास्त होने के बाद पृथ्वी छोड़ने की बात कही गई है. आँध्रप्रदेश के चित्तूर जिले में तिरुमला पर्वत माला के बिच बना है ये मंदिर जो की तिरुपति परिसर के उतर पश्चिम में स्तिथि है.

नरसिंघ के यंहा आ जाने के बाद प्रहृलाद जी ने ये जान लिया की भगवान् विष्णु ही सब कुछ है तो वो अपने चित में ही उनका मनन करने लगे. मनन करते हुए ही वो सोचते सोचते एकाएक ही समाधिस्थ हो गए थे, उनको समाधि में देख दैत्य विचलित हो गए लेकिन बाद में उन सब ने स्वतंत्र होकर पूरी धरती पर हाहाकार मचा दिया.

धरती पर सवर्त्र वो फ़ैल गए और उन्होंने सभी हदे पर कर दी, 3000 साल की समाधि के बाद प्रह्लाद....


image sources : blogspot

दैत्यों के अत्याचार से फिर दुखी पृथ्वी तब भगवान् विष्णु के पास पहुंची तब भगवान् प्रह्लाद के समक्ष प्रकट हुए, दैत्यों ने प्रह्लाद को पहले भी जगाने का प्रयास किया था लेकिन सब विफल रहे लेकिन तब श्री हरी ने अपना पांचजन्य शंख बजाया और प्रह्लाद उसे सुनते ही संधि से उठ खड़े हुए.

तब भगवान् विष्णु ने उन्हें कर्म और पुरुषार्थ का अर्थ समझाया उनका विवेक जागा और प्रह्लाद को चिरंजीवी होने का वरदान तब श्री हरी ने दिया था. प्रह्लाद को न्यायपूर्वक राज्य करने का आदेश देकर वो चले गए वैकुण्ठ तब प्रह्लाद ने गुरु शुक्राचार्य की कृपा से पुनः त्रिलोक पर अपना राज्य स्थापित कर लिया और धरती पर शांति छा गई.

हालाँकि बाद में इंद्र ने धोखे से उनसे भी वो राज्य छीन लिया था और उनके पास तब सिर्फ पाताल लोक का ही राज्य बच गया था बाद में उनके पुत्र विरोचन को इंद्र ने धोखे से प्राण ले लिया और विरोचन पुत्र बलि ने भी तब उनका बदला लिया और अब बलि और प्रह्लाद दोनों ही पातालपुरी में निवास करते है.

Share This Article:

facebook twitter google