Advertisement

वर्णव्यवस्था (त्रेता द्वापर युग) और जाती व्यवस्था (कलियुग) में है बड़ा अंतर, जाने...

"धर्म को जानने वाले बिना मांगे ज्ञान देते नहीं है और जो नहीं जानते है उनसे जवाब मांगते है वो लोग जो कभी दबे कुचले गए थे, वर्ण और जाती व्यवस्था को एक ही मानते है"
Advertisement

image sources : amazon

आज के समय में जो दलित चिंतक है वो सभी भारत में जातिगत राजनीती पर सवाल उठाते है और उसे धर्म से जोड़ते है लेकिन असल में जाती का धर्म से कोई लेना देना नहीं है. सतयुग में तो सिर्फ एक ही वर्ण होता है लोग सिर्फ आश्रम में ही निवास करते है और सिर्फ मोक्ष की चेष्टा ही धर्म होता है.

त्रेता युग से वर्ण व्यवस्था शुरू होती है जो की द्वापर तक चलती है, वर्ण व्यवस्था क्या है वो हम पहले ही विस्तार से बता चुके है. असल में सतयुग के लोगो ने त्रेता की शुरुवात में काम आपस में बाँट लिए सिर्फ मोक्ष की चेष्टा न करके तब लोग क्षत्रिय, व्यापारी और मजदुर/नौकर भी बन गए थे.

सतयुग में सभी गौरे रंग के इंसान होते थे और अपने काम को छोड़ दूसरा काम पकड़ने के चलते उनके रंग बदल गए इसलिए उनके कामो को वर्ण (रंग) के अनुसार पहचान दी जाने लगी. आज कलियुग में जो जाती व्यवस्था है वो उस वर्ण व्यवस्था का कलियुग के प्रभाव से ही बिगड़ा हुआ रूप है.

जाने इसके बारे में थोड़ा और विस्तार से....


image sources : lallantop

जाती व्यवस्था कुछ और नहीं बल्कि वर्ण का ही बिगड़ा हुआ रूप है, असल ये वंश संतति है. ब्राह्मणो की जाती गौत्र से पहचानी जाती है जो की विवाह में काम आती है, यानी एक ही वर्ण के लोग अपने गौत्र में विवाह नहीं करते है और ये गौत्र ही उसकी जाती बन जाती है मतलब ये वर्ण में वर्ण है न की अलग जाती.

ऐसे ही क्षत्रियो में 36 कौम है जो की उनकी अलग अलग जाती है आज के दौर में, ऐसे ही वैश्यों (व्यापारी, किसान और गौपालक) में भी ऐसी ही जाती है. क्षुद्रो में भी ऐसी ही गौत्र परम्परा है जिसके अंदर वो आपस में विवाह नहीं करते है.

सतयुग के अंत में जिन लोगो ने दासता स्वीकार करने की बात स्वेच्छिक रूप से मानी उन्हें ही क्षुद्र कहा गया जो की सबसे निम्न दर्जे का काम था. इस व्यवस्था में क्षुद्र का तन मन धन स्वामी का हो जाता था और उस क्षुद्र की सम्पूर्ण जिम्मेदार स्वामी की होती थी इसलिए उन्हें निन्दित कहा जाता था.

त्रेता द्वापर में तो उन्हें तिरस्कृत नहीं किया गया लेकिन कलियुग में उनके साथ अत्याचार हुआ जिसके चलते ही 80% निराकरण के बावजूद अब भी क्षुद्र समुदाय में रोष है. जबकि नौकरी पेशा को ही क्षुद्र कहा जाता है और आज तो 50% लोग नौकरी पेशा ही है.....
Advertisement

Share This Article:

facebook twitter google
Related Content
Lord krishna meet god vishnu in vaikuntha जाने, श्री कृष्ण को जब भगवान् विष्णु ने बुलाया था अर्जुन समेत वैकुण्ठ में....

भगवान विष्णु के अनेकोनेक अवतार हुए है और धरती पर उनके ही अवतारों के आमने सामने आने और वार्ता के कई प्रसंग है लेकिन क्या आप ने कभी सुना है की कोई अवतार वैकुण्ठ..

Bollywood actress top ugly moments बॉलीवुड एक्ट्रेस के कुछ सबसे भद्दे मोमेंट्स कैमरे में हुए कैद, ट्रोलर्स की हुई थी चांदी

बॉलीवुड एक्ट्रेस की गलतिया तो बहुत देखि समझी होगी लेकिन जब वो किसी ऐसे पल में कैद हो गई हो जो की ट्रोलर्स के लिए मौका रहा ता देखे ऐसे ही कुछ वीभत्स पलो को....

Know what is the principle of teacher to teach secret education to his pupil चेला लायक हो तभी गुरु को देनी चाहिए गुप्त शिक्षा, द्रौणाचार्य की आलोचना गलत है....

गुरु का भारतीय इतिहास में कितना महत्त्व है ये इस बात से ही जाने की खुद राम कृष्ण को भी गुरु की आवश्यकता पड़ी थी ज्ञान प्राप्ति के लिए, लेकिन अगर आप द्रोण से वैर

Rajnikanth love story & others too Love Story : इंटरव्यू लेने आई पत्रकार से हो गया था पहली नजर में प्यार, लेकिन संस्कार

हिंदी फिल्मो में आपने अलग अगल रंग की फ़िल्मी कहानिया देखि होगी लेकिन क्या सुपर स्टार्स की रियल लव स्टोरीज आपको पता है? जाने रजनी समेत कई स्टार्स की प्रेम गाथाये.

bollywood villains amazing facts short know माँ सीता के रोल से की थी प्राण ने अपने एक्टिंग की शुरुवात, जाने ऐसे ही खलनायको के फैक्ट्स

जैसे भूत न हो तो भगवान् का किसी को डर नहीं होता वैसे ही अगर फिल्मो में खलनायक न हो तो हीरो का भी रुतबा नहीं बनता है, जाने बॉलीवुड के खलनायको के चौकाने वाले फैक्

Lord shiva or vishnu who is supreme? अगर भगवान् शिव और विष्णु में से एक में है कट्टर आस्था, तो मोक्ष के लिए ये भी करे..

कलियुग में, भगवान् शिव के भक्तो के समुदाय को शैव या स्मार्त कहा जाता है तो भगवान् विष्णु के भक्तो के समुदाय को वैष्णव! लेकिन अगर आपकी दोनों में से एक में ही....