भगवान कृष्ण की पत्नी सत्यभामा ने मारा था इस राक्षस को, जाने अद्भुद कथा....

"हरी अनंत हरी कथा अनंता कृष्ण ने तो 111 साल में वो कर्म किये की जगतगुर बन गए लेकिन उनकी पत्नी ने भी अपने ही पुत्र के प्यार को बचाने के लिए वध किया था इस दानव का"

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सभी को विदित ही है की श्री राम के पिता राजा दशरथ की तीसरी पटरानी कैकयी बड़ी लड़का थी, उन्होंने देवासुर संग्राम में अपने पति के सारथि का काम किया. घायल दशरथ जी को उन्होंने तीन बार बानो के शिकार होने से बचा लिया था जिसके बदले में उन्हें तीन वरदान मिले थे.

पौराणिक इतिहास में इनके आलावा माँ दुर्गा ही ऐसी ही जिन्होंने नौ रूप धारण कर रक्तबीज, महिषासुर और शुम्भ निशुम्भ सरीखे अवध्य दानवो का संहार किया था. उनके बाद शायद लक्ष्मी बाई और कर्णाटक की रानी कुत्तूर चिन्नमा ही ऐसी वीरांगनाये हुई होगी.

लेकिन क्या आप जानते है भगवान् कृष्ण की 8 पटरानियों में से एक सत्यभामा भी ऐसी ही लड़का थी? समयान्तक मणि की चोरी का कृष्ण पर झूठा आरोप लगाने वाला राजा ने अपनी पुत्री को कृष्ण से ब्याह कर माफ़ी मांगी थी, उसी राजा सत्राजित की बेटी सत्यभामा थी.

जाने उनके शौर्य की संक्षिप्त कथा....


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पहले जाने ये नरकासुर आखिर था कौन? पृथ्वी की रक्षा के लिए भगवान् विष्णु वराह रूप में प्रकट हुए थे हिरण्याक्ष को मार के पृथ्वी का उद्धार किया था. तब पृथ्वी देवी और उनके मिलन से ही ये नरकासुर राक्षस जन्मा था जिसको की वरदान था की वो अपनी माँ के आलावा किसी और के हाथो नहीं मारा जा सकता.

हालाँकि शुरू में वो सतगुणी ही था लेकिन बाद में मुर और बाणासुर की संगत में पड़ वो भी तामसी हो गया और 16100 राजकुमारियों के पिता को मार कैद कर लिया. वो उनकी बलि देकर अमर हो जाना चाहता था लेकिन इसी दौरान उसने इंद्र की पत्नी के कुण्डल छीन लिए थे.

इसके बाबत इंद्र ने कृष्ण से प्रार्थना की, उनकी पत्नी सत्यभामा असल में भूदेवी (पृथ्वी) का ही अवतार थी! कृष्ण उन्हें साथ ले गए और उन्ही ने तब नरकासुर का वध किया था, अपने पुत्र की सद्गति के लिए ही तब सत्यभामा जी ने नरक चतुर्दशी को दिए जलाने वाले को पुण्य की प्राप्ति होगी का वरदान भी दिया था.

तो ऐसे अपने ही पुत्र को मारने वाली वीरांगना था देवी सत्यभामा....

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