तो क्या इसी गुफा में सोता था कुम्भकरण 6 महीने के लिए, श्रीलंका नहीं इस देश में है ये....

"17 लाख साल पहले घटी हुई रामायण की कथा का मुख्य भाग लंका कहा तक फैला हुआ था ये विस्तार से कंही नहीं लिखा है इसलिए कुछ रोचक कयास जाने जो आपको मचलने पर मजबूर करेंग"

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सभी को पता है की कुम्भकरण भीमकाय राक्षस था और जो 6 महीने तक तसल्ली से सोता रहता था जब उठता था तो 6 महीने खाता ही रहता था और फिर सो जाता था. लेकिन अगर वो करवट भी ले लेता तो पूरा घर टूट कर बिखर जाता और शांति में नींद आती है दिन में कहा शांति होने वाली थी.

इसलिए वो एक गुफा में ही अपना घर बनाकर रहता था जो की बहुत बड़ी थी वंही उसके रहने सोने खाने की व्यवस्था कर दी गई थी. ऐसा ही कुछ स्थान वो भी बताया गया था रामायण में जंहा मेघनाद ने यज्ञ (निकुंभला देवी का) आरम्भ किया था जिसे की वानर सेना ने ध्वस्त कर दिया था.

अगर वो यज्ञ सफल हो जाता तो वो अजेय हो जाता इसलिए उसे ध्वस्त भी किया गया और लक्ष्मण जी ने वंही उसका संघार भी किया था. लेकिन रामायण में वो जगह की लोकेशन नहीं बताई गई है इसलिए कयास ही लगाए जा सकते है, तो क्या आपको पता है कहा है वो जगह.


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निश्चित होकर तो हम नहीं कह सकते है लेकिन हमारा पहले ही कयास रहा था की मलेशिया और इंडोनेशिया भी लंका के ही हिस्से थे. चूँकि लंका त्रिकूट पर्वत पर बनी थी यानी तीन पर्वत श्रंखलाओ का समूह पर और हनुमान जी की 100 योजन यानी की 1200 किमी की छलांग जोड़ी जाए तो लंका तक सिर्फ 220 किमी होते है और मलेशिया तक ये 100 योजन हो जाती है.

इसलिए आज भी इन दो देशो में रामायण की छाप है और इसलिए हमारा दावा है की हो न हो बटु केव ही वो स्थान है जंहा कुम्भकरण सोता था. इन्ही पर मेघनाद ने यज्ञ किया था जो की ध्वस्त किया था वानरों ने इसलिए यंहा पर हनुमान जी और राम जी की मुर्तिया है और कई मंदिर भी है.

रामायण का एक और अकाट्य प्रमाण....

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