जाने आखिर क्यों छोटे भाई ने बड़े भाई पर लगाए थे उसकी ही गर्लफ्रेंड से रिश्तो के आरोप?

"गन्दा है पर धंधा है ये यु ही नहीं कहते है बॉलीवुड को इन रिश्तो की कोई मर्यादा नहीं है ऐसा ही वाकया हुआ जब छोटे संजय ने बड़े भाई फ़िरोज़ पर उनकी गर्लफ्रेंड के साथ "

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अफगानी मूल के शरणार्थी पठान मुस्लिम परिवार में बंगलौर शहर में फ़िरोज़ खान और संजय खान का जन्म हुआ था, फ़िरोज़ कान्वेंट स्कूल में पढाई के बाद मुंबई आ गए. वंहा उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री ज्वाइन की और 1960 में डेब्यू किया था. जल्द ही उन्होंने अपनी जड़े जमा ली और फिर अपने भाई संजय को भी सेट कर लिया.

दोनों भाई बिगड़ैल और लट्ठ बाज थे, दोनों के ही इंडस्ट्री में मारपीट की घटनाएं आम थी. फ़िरोज़ खान ही वो शक्श है जिसने संजय दत्त को डॉन दाऊद इब्राहिम से मिलवाया था, जिसके बाद ही वो मुंबई बम धमाकों में फंसे थे. फिल्म दयावान को हिट करवाने के लिए उन्होंने माधुरी को बड़ी रकम देकर तैयार किया था और फिल्म सफल रही.

वंही संजय जो की शादी शुदा थे जीनत से इश्क फरमाने लगे, एक बार जीनत को इज्जत लूटने से बचाने के लिए उन्होंने मार खाई थी और तो और उन्होंने तब उन्हें बचाने के लिए बन्दुक बाजी भी की थी. दोनों में प्रेम पनप गया जीनत तो उनकी गुलाम बन गई थी लेकिन इसी दौर में ऐसा क्या हुआ था की बात बिगड़ गई.

संजय ने बड़े भाई फ़िरोज़ पर ही लगा दिए थे जीनत से अवैध रिश्ते होने के आरोप.....


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1977 में संजय खान प्रोडूसर बन गए थे और चांदी सोना फिल्म बनाई जिसमे परवीन बॉबी का बोल्ड अवतार था लेकिन फिल्म पिट गई. तब उन्होंने अपनी जमा पूंजी झोंक कर अब्दुल्ला बनानी शुरू की और अपनी प्रेमिका ज़ीनत को साइन कर लिया था जो की उस समय हिट की गॅरंटी हुआ करती थी और फिल्म के बाद शादी का भी वादा करना पड़ा था.

लेकिन फिल्म में वित्तीय अड़चने आई और फिल्म डिले हो गई इसी दौरान ज़ीनत ने फ़िरोज़ को क़ुरबानी के लिए पूरी डेट दे दी! जब संजय ने फिर फिल्म शुरू करनी चाहि तो जीनत ने डेट फ़िरोज़ को दे दी है का हवाला दिया इससे संजय तमतमा गए थे और अपने ही भाई पर अपने छोटे भाई की माशूका से सम्बन्धो के आरोप लगा डाले.

इसी गुस्से के चलते संजय ने जीनत को शादी के लिए भी मना कर दिया और जब एक पार्टी में ज़ीनत रोने लगी तो संजय ने उन्हें मार मार के लहू लुहान कर दिया. इसी घटना में उनकी एक आँख खराब हो गई जिसे वो छुपाती रही, फ़िरोज़ ने पुलिस कम्प्लेन को कहा लेकिन ज़ीनत प्यार में असफल इसके लिए तैयार नहीं हुई थी.

ये प्यार नहीं जनाब व्यापार था...

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