दशरथ जी के महल में 1000 कमरे थे, किस्मे हुआ राम जी का जन्म कौन जाने? जाने जवाब....

"एक शाम मस्जिदे जन्मस्थान के नाम कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कांग्रेस पार्टी के लीडर मणिशंकर ने विवादित ढांचे के निचे राम जन्म स्थान होने की प्रमाणिकता पर सवाल"

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अल्लामा इक़बाल ने भगवान् राम को "इमामे हिन्द" कहा था वंही राम पूरी दुनिया की आस्था के प्रतिक है अकेले हिन्दुओ के नहीं. लेकिन फिर भी जब से बाबर ने मीर बाकी से जन्मस्थान का मंदिर तुड़वाया है तभी से उनकी नगरी आयोध्या में उनको स्थान नहीं मिल पाया है.

1885 से कोर्ट में केस चला और आजादी के बाद भी आज भी केस ही चल रहा है और श्रद्धालु उनके जन्मस्थान पर विशाल मंदिर की मांग पर आशाहीन हो चले है. इस्पे भी सुप्रीम कोर्ट देरी करके सितम कर रहा है लेकिन देश की प्रमुख राजनैतिक पार्टी के  नेता जख्मो पर नमक छिड़क रहे है.

"एक शाम मस्जिदे जन्म स्थान (बाबरी) के नाम" कार्यक्रम में कांग्रेस लीडर मणिशंकर अय्यर आमंत्रित थे तो उन्होंने वंहा कहा की "दशरथ जी के महल में 1000 कमरे थे उनमे से राम कौन से कमरे में पैदा हुए कौन जनता है, इसलिए मस्जिदे जन्म स्थान ही राम जी का जन्म स्थान है इसका कोई सबूत किसी के पास नहीं है.

लेकिन उनकी ये सोच गलत है, स्कन्द पुराण में भगवान् राम के जन्म स्थान की पूरी लोकेशन बताई गई है....जाने


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अब राम मंदिर के विरोधी जो की वायुसेना अध्यक्ष तक को झूठा बता चुके है इसे मानेंगे या नहीं पता नहीं लेकिन गीता प्रेस की स्कन्द पुराण की किताब में साफ़ लिखी है राम के जन्म स्थान की जगह. ऊपर उसके संक्षिप्त वर्जन जिसमे सिर्फ हिंदी है के पेज नंबर 528 का स्नैपशॉट है.

इसमें शुरू में इसके उतर में लिखा है और इसके है नंदीग्राम, मतलब नंदीग्राम के उतर में मत्तगजेन्द्र है जो की अयोध्या का रक्षक है और विभीषण के पुत्र है. इसके पूर्व में पिण्डारक धाम और पिण्डारक के पश्चिम में विघ्नेश्वर गणेश मंदिर है जिसके ईशान कोण में राम जन्म भूमि है.

यंहा गौर करने वाली बात ये है की बाबर ने गणेश मंदिर भी तोड़ दिया था, लेकिन विघ्नेश के पूर्व में वशिष्ठ आश्रम लिखा है जो की आज भी विधमान है. वशिष्ठ के उतर और लोमश के पश्चिम में जन्मस्थान है ये लिखा है और लोमश ऋषि का भी स्थान आज भी मौजूद है.

मतलब जिस स्थान पर राम जन्म भूमि का दावा VHP कर रही है वो ही स्थान पुराण में बताये स्थान पर है और क्या सबूत चाहिए पुराण ही हमारा इतिहास है जिन्हे वेदव्यास जी ने लिखा है....

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