नारद जी की पत्रिकारिता का शाश्त्रो में एक भी नहीं है उदाहरण, बॉलीवुड ने बना दिया पत्रकार!

"नारद ऋषि भी पहले कभी गन्धर्व थे जो कालांतर में अपने कर्मो से देवर्षि और ब्रह्मा जी के पुत्र बन गए, लेकिन ये राह आसान नहीं थी. गन्धर्व हिमालय की कंदराओं में....."

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देवर्षि नारद की जयंती पर अब तो सरकार भी पत्रकारों को सम्मानित करने लगी है तो क्या आप भी मानते है की नारद जी इधर की उधर करते थे? शाश्त्र के किसी जानकार को अगर आप पूछेंगे की क्या नारद जी सच में पत्रकार थे तो वो आपको क्रोध की अग्नि से डरा देगा.

नारद जी तो भगवान् नारायण के परम भक्त है जो की सिर्फ और सिर्फ भक्तो से ही संवाद करते है न की दुष्टो से, ये बात कह सकते है की देवज्ञा से ही वो दुर्जनो से भी संवाद करते है. लेकिन उनका उद्देश्य सदैव मानव मात्र का कल्याण और भक्तो का कल्याण ही रहा है.

शाश्त्रो में ऐसा एक भी उदाहरण नहीं है जंहा नारद जी ने पत्रकार का काम किया हो, ब्रह्मा जी के मानस पुत्र नारद जी नारायण नारायण ही रटते है नित निरंतर. रावण और नारद जी के किसी संवाद के बारे में आपने नहीं पढ़ा होगा न ही वो कंस से मिले थे हालाँकि कुछ फिल्मो में उन्हें देवकी का आठवां कौनसा पहला कौनसा कह के कंस का पाप कलश भरवाने वाला दिखाया है.

जाने ऐसी सभी घटनाओ के बारे में जिससे उन्हें फिल्मो में बना दिया पत्रकार जबकि बात कुछ और ही थी...


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हिरण्यकश्यपु की पत्नी कयाधु का इंद्र हरण कर रहा था तब नारद जी उसे मुक्त करा कर अपने आश्रम में शरण देने वाले हुए थे. जंगल में परमपद पाने को भाग रहे 4 वर्षीय बालक ध्रुव को उन्होंने ही गुरु मन्त्र दिया था तभी वो भगवान् से सर्वोत्तम पद पा सका था, अन्यथा उसे जानवर खा जाते वन में.

द्रौपदी को पांच पतियों से कैसे व्यव्हार करना है (1-1 साल प्रति के साथ) उन्होंने ही सलाह दी थी, त्रिदेव तो सर्वज्ञ है उनसे उधर की उधर करके क्या लाभ जैसा की फिल्मो में दिखाया गया है. भक्तो तक भगवान् उन्हें मार्गदर्शन के लिए ही भेजते थे तब वो जाते थे नहीं तो सिर्फ नारायण धुन ही गाते है.

जब सत्यभामा को रुक्मणि से ईर्ष्या हुई तो पूजा पाठ करवाने गए और वो तुलाभार के जरिये उन्हें ज्ञान दे आये थे. तो नारद जी पत्रकार नहीं बल्कि भक्त और भगवान् के बिच की एक कड़ी है, नारायण नारायण...

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