जाने कैसे फ़िल्मी नारद आया गृहस्थी में, बेटे ने रेखा से अफेयर के चलते बर्बाद किया...

"हिंदी हो या धार्मिक फिल्मे सभी में नारद ऋषि को पत्रकार की छवि का दिखाया गया है जबकि ऐसा शाश्त्रो में बिलकुल ही नहीं है, असल में वो एक भक्त थे. लेकिन उनके पात्र"

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गिलगित बाल्टिस्तान (अब पाकिस्तान के कब्जे में) के गवर्नर एक्टर जीवन के दादा जी थे, जब वो 3 साल के तभी उनके पिता जी चल बसे और कुछ सालो में माँ भी. चौंकाने वाली बात ये है की वो अपने माता पिता के 24 भाई बहनो में से एक थे, बचपन से एक्टिंग का शौक था तो 26 रूपये दादा से लेकर मुंबई में आ गए.

शुरू में उन्हें भाव नहीं मिला लेकिन बाद में उन्हें पहला काम मिला रिफ्लेक्टर पर सिल्वर कागज चढ़ाने का जो भी उन्होंने किया. तब अनंत उन्हें मोहन सिन्हा की फिल्म अनुराधा में नोटेबल काम मिला लेकिन उन्होंने 49 फिल्मे अलग अलग भाषाओ में ऐसी की जिसमे वो नारद ऋषि बने थे.

तब धार्मिक फिल्मे ही ज्यादा बनती थी और उन्होंने पहली ही फिल्म में नाम कमाया तो काम भी पाया, लेकिन बाद में उन्होंने सहायक तो उसके बाद विलन का भी रोल मिलने लगा. अमर अकबर अन्थोनी में उनकी भूमिका यादकर रही थी, 1987 में मुंबई में उनका देहांत हो गया लेकिन उनके बाद उनके बेटे को बॉलीवुड में काम मिला पर... 


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पिता के नक्शे कदम पर बेटे को चलना था इसलिए एक्टिंग का डिप्लोमा लिया लेकिन काम मिला 1971 में शुरुवात में ही असफल रहे तो उन्होंने भी पाँव पींछे लिए. बाद में उन्होंने भी पिता के जैसे ही विलन का रोल किया और उसी में चलते रहे लेकिन रोल भी छोटे ही मिले.

धड़कन में उनके पिता का रोल (शिल्पा के) ही लोगो को याद है अब वो टीवी पर सीरियल भी करने लगे है हालाँकि उन्हें साल में 15 फिल्मो में अभी भी काम मिल रहा है.

वो खबरों में भी आये थे तो सिर्फ रेखा से अफेयर के लिए अन्यथा वो चर्चा में भी कभी नहीं आये, असल में रेखा ने नवीन निश्छल को जलाने के लिए किरण का इस्तेमाल किया था जो की दिखने में तब स्मार्ट ही थे. हालही में मिटू का विरोध करके वो चर्चा में आये थे.

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