तो क्या भाई गणेश की ही भांति कार्तिकेय की भी हुई थी दो दो शादिया?

"भगवान् शिव के पुत्र कार्तिकेय गणेश की पहले शादी से नाराज होकर घर कैलाश से चले गए थे उन्हें मनाने के लिए ही शिव ने मल्लिकार्जुन रूप तो क्या बाद में शादी कर....."

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भगवान् शिव के पुत्र स्कन्द ही दक्षिण भारत में मुरुगन के नाम से जाने जाते है इसके आलावा उन्हें स्कन्द, सुबरमण्यम, गुहा और सरवन तक कहा जाता है. कार्तिकेय की सवारी मोर है और वो देवताओ की सेना के सेना पति है उन्होंने 7 दिन की उम्र में तारकासुर का वध किया था.

उनके जन्म की कथा बेहद अद्भुद है जो की आपने हमारे पहले के ब्लॉग में पढ़ ही ली होगी इसके गणेश के विवाह पहले किये जाने के चलते उनकी नाराजगी की बात भी सबको पता है लेकिन, उसके बाद क्या हुआ वो कहा चले गए थे नाराज होकर? असल में इसी कथा के चलते मल्लिकार्जुन (ज्योतिर्लिंगों में से एक) अवतार हुआ था शिव शक्ति का.

लेकिन आज हम बताने जा रहे है उसके आगे की कहानी, भगवान् स्कन्द ने भी गणेश जी की ही भांति एक नहीं बल्कि दो दो शादिया की थी. उनकी एक पत्नी का नाम देवसेना तो दूसरी का नाम वाली था लेकिन दोनों ही शादिया गणेश की भांति साथ नहीं हुई थी और दोनों के पीछे अलग अलग घटनाएं है. 

जाने उनके विवाह की कथाओ को...


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तारकासुर सिर्फ 7 दिन के बालक से ही वध्य था ऐसे में अण्ड रूप से जन्मे बालक स्कन्द जन्म से ही बेहद शक्तिशाली थी और उन्होंने तब देवताओ की तरह से युद्ध में भाग लिया और तारकासुर का वध किया था. इस युद्ध में स्कन्द देवताओ के सेनापति बने थे और उन्होंने आजीवन ये पद ग्रहण किया.

युद्ध में जित के उपलक्ष में इंद्र ने अपनी पुत्री देवसेना का विवाह स्कन्द से कर दिया था जो की उनकी पहली पत्नी हुई. अब जाने उनके दूसरे प्रेम विवाह की कथा को...


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असल में स्कन्द की दोनों पत्निया पूर्व जन्म में वरदान प्राप्त थी उनसे शादी के लिए, देवसेना से तो विवाह हो गया लेकिन दूसरी पत्नी वाली से विवाह अभी बाकि था. तब वन में विचरती हुई वाली को स्कन्द ने प्रेम याद दिलाना चाहा लेकिन उसे याद नहीं आया था.

तब भाई गणेश की मदद ली उन्होंने और एक हठी का रूप लेकर गणेश वाली के पीछे दौड़े थे, तब स्कन्द ने उसकी रक्षा की थी. इसके बाद तो प्रेम उपजना ही था और दोनों ने प्रेम विवाह किया तो ऐसे भगवान् शंकर के दोनों पुत्रो ने दो दो शादिया की लेकिन शुभ और लाभ दो शिव जी के पोते गणेश से ही है.

कार्तिकेय पुत्र के बारे में कोई प्रसंग अभी तक नहीं आया है शाश्त्रो में....

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