जब दोस्त विनोद खन्ना की पत्नी का उनके सामने ही फ़िरोज़ खान ने किया उत्पीड़न तो...

"फ़िरोज़ खान और विनोद खन्ना की दोस्ती ऐसी थीकि दोनों की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी लेकिन ज्यादा दोस्ती भी कभी दुश्मनी बन जाती है लेकिन इसका कारण भी गंभीर होता है.."

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1976 में शंकर शम्भू, 1980 में क़ुर्बानी तो 1988 में दयावान में विनोद खन्ना और फ़िरोज़ खान ने परदे पर दोस्ती का चित्रण किया लेकिन असल जिंदगी में भी दोनों जिगर के छल्ले थे. दोनों का रसायन शाश्त्र का मेल बॉलीवुड की पार्टियों में भी दीखता था जिसमे दोनों एक दूसरे के साथ जाम छलकाते थे.

मुख्य रूप से दयावान में फ़िरोज़ खान जिसके डायरेक्टर भी थे सब कुछ झोंक कर विनोद खन्ना को हिट करवाना चाहते थे. इस फिल्म के लिए माधुरी को तैयार करना आसान नहीं था इसलिए उन्हें आज के समय के 9 करोड़ रूपये देकर तैयार किया था उस रोमांटिक दृश्य के लिए.

लेकिन दोनों की दोस्ती में उनके करियर के शुरुवात में ऐसी खटाई भी पड़ गई थी जिसे न सुलझाया जाता तो शायद दयावान न बनती. 1975 में फ़िरोज़ खान ने धर्मात्मा फिल्म बनाई थी जो की बेहद सफल रही थी जिसकी सक्सेस पार्टी में सभी कलाकारों को बुलाया था विनोद खन्ना जोड़े से पहुंचे थे.

दोनों ने खूब शराब छलकाए लेकिन विनोद खन्ना की पत्नी के साथ तब फ़िरोज़ खान ने...


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पार्टी के दौरान फ़िरोज़ खान मस्ती में आ गए थे और जिससे मिलते उसके साथ ठुमकने लगे थे, जो हाथ में लगा उसे ही बांहो में ले नाचने लगते. लेकिन इसी बिच उनकी गिरफ्त में विनोद खन्ना की पत्नी गीतांजलि आ गई जिसके साथ वो नाचने लगे इससे शायद किसी को आपत्ति नहीं थी.

लेकिन काफी देर तक नाचते हुए भी वो उनके साथ बदसुलूकी करने लगे और मिसेज खन्ना असहज हो गई, विनोद खन्ना की नजर अपनी पत्नी पर पड़ी जो की फ़िरोज़ की बांहो में झटपटा रही थी. विनोद वंहा गए और अपनी पत्नी को अलग करने लगे लेकिन फ़िरोज़ की गिरफ्त से वो अपने आप को छूटा नहीं पा रही थी.

तब विनोद खन्ना ने फ़िरोज़ को धक्का देकर निचे गिरा दिया और गीतांजलि को बचाया, इसपे फ़िरोज़ आग बबूला हो गए और हाथापाई के लिए आगे बढ़े. विनोद ने उनका कलर पकड़ लिया और मारने लगे ही थे की इतने में संजय खान आ गए और दोनों को अलग किया, विनोद पार्टी से चले गए.

अगले दिन जब नशा उतरा तो फ़िरोज़ ने विनोद के घर जाकर माफ़ी मांगी और विनोद ने भी नशे में था समझ कर माफ़ कर दिया था....

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