Depression Killer: अशोक वृक्ष होता है बेहद चमत्कारिक, जाने सनातन देवीय वृक्षों के महत्त्व को

"रामायण के दौरान लंका में सीता जी जिस पेड़ के निचे शरण लेती है जिसके नाम पर उस उधान का नाम था वो अशोक वृक्ष था लेकिन क्या आप उसके चमत्कारिक फायदे जानते है? जाने"

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सेकुलरिज्म की हद देखिये की पीपल, वट और अशोक जैसे भारतीय संस्कृति के महत्त्व के पेड़ भी किसी सरकारी योजनाए के तहत उगाये जाए तो भी इसको भगवाकरण का नाम देकर उसका विरोध होता है. मतलब हिन्दुओ की आस्था का सम्मान होना ही देश के लिए खतरा है और उनकी भावनाओ का अपमान ही धार्मिक सद्भाव! ग़जब है....

लेकिन हिंदुस्तानी भी इसका विरोध नहीं करते है क्योंकि उन्हें अब इन पेड़ो का महत्त्व भी मालूम नहीं है के क्यों भारतीय संस्कृति में इन्हे पूजा जाता है. असल में एक साजिश के तहज पहले मुघलो ने फिर अंग्रेजो ने तो फिर देश के राजनैतिक दलों ने हमें धर्म से दूर रखा है इसे जहर बताकर जिसके चलते हम आज धर्म से दूर हो चले है.

अशोक वृक्ष को हम जानते है तो सिर्फ और सिर्फ रामायण के चलते जिसमे सुंदरपर्वत पर घटित सुन्दरकाण्ड के दौरान अशोक वाटिका में सीता जी अशोक वृक्ष के निचे बैठी थी. हनुमान जी भी इसी वृक्ष की डालियो में छुप पर निश्चित समय की प्रतीक्षा कर रहे है अन्यथा हम अशोक वृक्ष को पहचानते तक नहीं.

जाने अशोक वृक्ष समेत सभी भारतीय देवीय वृक्षों की महिमा, डिप्प्रेशन की काट है अशोक वृक्ष जाने....


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अशोक वृक्ष के महत्त्व को आप उसके नाम सही समझ सकते है जिसका अर्थ है अ शोक मतलब शोक को हरने वाला, भगवान् शिव का भी एक नाम अशोक है. डिप्रेशन से ग्रसित लोगो के लिए ये वृक्ष किसी वरदान से कम नहीं है, जिस किसी को भी अवसाद ने घेर लिया हो उसे अशोक वृक्ष के निचे जाकर एक प्रार्थना करनी चाहिए.

"हे अशोक वृक्ष जैसे आपने माँ सीता का शोक हरा था वैसे ही मेरा भी शोक हर, अपने नाम के अनुरूप मुझपे कृपा कर." एक बार अवश्य कोशिश करके देखे, क्योंकि ऐसी ही प्रार्थना सीता जी ने भी रामायण में सुन्दरकाण्ड के दौरान की थी जिसके बाद हनुमान जी ने तुरंत ही राम मुद्रिका उनके आगे गिरा दी और उनका शोक हर लिया था.

"सुनहि विनय मम विटप अशोका, सत्य नाम करू हरु मम शोका! जनु अशोक अंगार दिन हरषि उठी कर गयहु"

जाने ऐसे ही और भी दिव्य वृक्षों के चमत्कारी प्रभाव....


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पिप्पल, बनयान और वट ये तीन पेड़ भी काफी धार्मिक महत्त्व के है, घर या मंदिर में पूजा के बाद फूल पुष्प आदि इनके निचे चढ़ाई जाती है साथ ही खंडित या एक बार पूजा की गई तस्वीर भी. असल में ये सभी निर्माल्य सुबह के शाम को घर में नहीं रखे जाते है और ये नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह करते है. 

ये सभी दिव्य वृक्ष नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाले होते है इसलिए ऐसा किया जाता है, इन वृक्षों के निचे विशेष तिथियों में दीपदान देने से पितृ तृप्त हो जाते है. इसके आलावा ये सभी वृक्ष प्राण वायु यानि ऑक्सीजन उत्सर्जन करने में बाकि सभी वृक्षों के मुकाबले कई गुना तेज होते है.

तुलसी का झाड़ या वृक्ष भी ऐसा है की घर में कोई नकारात्मक ऊर्जा घुसते ही वो झुलस जाता है यंहा तक की रजस्वला औरत के पास आते ही वो उसकी गर्मी से जल जाता है. इसलिए इन वृक्षों के पास अशुद्धता करने से पहले ये विचार कर लेना चाहिए की कंही लेने के देने न पड़ जाये.

धर्मो रक्षति रक्षिताय....

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