गरुड़ पुराण : बच्चो की मौत पर अंतिम संस्कार है बेहद जरुरी, नहीं किया तो बन जाते है पिशाच....

"वैसे तो बच्चो की मौत बेहद दुखद घटना है लेकिन इसके बावजूद भी माता पिता को धीरज रख कर उनके अंतिम क्रिया में सावधानी बरतनी चाहिए, अगर ऐसा नहीं किया गया तो पिशाच बन"

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यम नचिकेता का संवाद उस समय एक बड़ी उपलब्धि और काफी दुर्लभ वृतांत था क्योंकि वो सतयुग या त्रेता की बात थी, जबकि गरुड़ पुराण द्वापर के अंत में वेदव्यास जी लिखते है जो की हमारे लिए एक सौभाग्य की बात है. लेकिन मुघलो अंग्रेजो और आजादी के बाद देश की सरकारों ने हमें धर्म (सनातन) से दूर करने का प्रयास किया.

ये ही कारण है की आज हर घर में कलह दरिद्रता अशांति आदि आदि है जिसका कारण है प्रेत बढ़ा पितृ दोष आदि आदि. विवाहित या युवाओ की मौत पर तो फिर भी हम अंत्येष्टि कर्म लगभग ऐसे कर देते है की उनकी मुक्ति हो जाती है लेकिन बच्चो के अंतिम संस्कार के बारे में बहुत कम ही लोग पूरी तरह जानते है.

ज्यादातर बच्चो की मौत पर उन्हें जलाने की जगह दफना दिया जाता है जो की काफी मामलो में सही ही है लेकिन सिर्फ दफना ही देना इसका सम्पूर्ण अंतिम संस्कार नहीं है. क्या आप जानते है की उम्र के पड़ावों और संस्कारो की संख्या पर निर्भर करता है बच्चो का अंतिम संस्कार?

जाने कुछ महत्वपूर्ण जानकारी....


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गरुड़ पुराण के अनुसार अगर किसी स्त्री का गर्भपात हो जाए या गर्भस्त्राव हो जाए तो अपना भला चाहने वाले परिवार जनो को उसके लिए कुछ भी नहीं करना चाहिए उस बच्चे को दफना देना चाहिए. लेकिन अगर उसका जन्म हो जाए और उसके बाद वो चूड़ाकरण संस्कार या दांत आने से पहले मर जाए तो उसे दफनाना तो चाहिए लेकिन...

उसके पीछे उसके निमित छोटे बच्चो को दूध पिलाना चाहिए या दुःख का दान जरूर करना चाहिए जिससे उसकी मुक्ति हो जाती है. वंही अगर दांत आने के बाद या 22 महीने से अधिक और उपनयन संस्कार के बिच की उम्र के बच्चे/युवक की मौत हो तो उसको दफनाना नहीं चाहिए बल्कि उसका अग्नि संस्कार होना चाहिए.

हालाँकि उसका ग्यारहवा बारहवा और महादान नहीं करना चाहिए लेकिन बरसी (घड़ा भरना) अवश्य करना चाहिए, अगर ऐसा नहीं किया जाता तो वो बच्चा 5 वर्ष की उम्र के बाद पिशाच बन जाता है और फिर आपको ही परेशान करने वाला है.

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