पुरुषार्थ : जाने कौन कौन से देवताओ की बेटीयो की शादी हुई थी मनुष्यो से?

"अगर आपमें पुरुषार्थ होतो तो कुछ भी हासिल करना असम्भव नहीं है भारतीय इतिहास में मर्द तो अप्सराओ को भी ब्याह लाये थे लेकिन क्या आप जानते है कुछ देवो की बेटियां भी"

image sources : youtube

सशरीर स्वर्ग (जिन्दा रहते) जाकर आने वाले सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर अर्जुन को कौन नहीं जानता जिसने वंहा अप्सराओ से नृत्य सीखा था. ऐसे ही राजा मुचुकंद ने इंद्र की तरफ से युद्ध लड़ा था तो पुरुरवा नाम के राजा ने तो स्वर्ग की अप्सरा को ही पत्नी बनाकर घर में रख लिया था.

ऐसा है धरती के धर्मधारी मनुष्यो का पुरुषार्थ लेकिन आज हम बात करेंगे उससे भी एक कदम आगे की. कुछ ऐसे भी मनुष्य हुए है जिन्होंने अप्सराओ को तो छोड़िये बल्कि देवो की कन्याओ का पाणिग्रहण किया था जी हाँ, मतलब देवताओ की बेटियों को ब्याहे गए थे वो शक्श.

यमुना जी जो की भगवान् सूर्य की पुत्री है ने भी धरती पर मनुष्य रूप में जन्मे भगवान् कृष्ण से विवाह किया था और उनकी अर्धांगिनी कहलायी. कृष्ण तो वैकुण्ठ पहुँच चुके है लेकिन उनकी पत्नी आज भी धरती पर विधमान है, अगर आप कृष्ण को भगवान् मानते है तो चलो आम इंसान के उदाहरण भी बता दे रहे है...


image sources : wikipedia

पारवती जी ने एक बार अशोक वृक्ष से पुत्री की इच्छा व्यक्त की थी और तत्काल ही शिव जी के ही रूप अशोक वृक्ष से एक कन्या उत्पन्न हुई जो की अशोक सुंदरी के नाम से प्रसिद्द हुई थी.

पार्वती जी चाहती थी के अशोकसुन्दरी का विवाह ऐसे शक्श से ब्याही जाए जो की इंद्र के समान हो. तब धरती के राजा नहुष के साथ अशोकसुन्दरी का विवाह कर दिया गया था जो की शिव जी का जमाता हुआ इस रिश्ते से और उनके जो पुत्र हुआ वो शिव जी का नाती.

राजा नहुष के पुत्र का नाम ययाति था जिससे की आगे बढ़ते हुए कौरव/पांडव और यदुवंश हुए, ययाति के शुक्राचार्य को दिए एक पत्नी वचन को तोड़ने के चलते (शर्मिष्ठा से विवाह कर के) उसे श्राप मिला था और वो तब बूढ़ा हो गया तब छोटे पुत्र कुरु ने उन्हें अपनी जवानी दी थी.

ऐसे ही पार्वती जी की बहिन गंगा का विवाह बाद में शांतनु से हुआ था...


image sources : wikipedia

शिव जी से मृत संजीवनी मन्त्र पाने के लिए तपस्या कर रहे शुक्राचार्य (भृगु पुत्र उशना ऋषि) की तपस्या भंग करने के लिए इंद्र ने अपनी ही बेटी जयंती को भेज दिया था. तपस्या के बिच ही उन्होंने तब जयंती का पाणिग्रहण कर उसके साथ समागम किया और देवयानी नाम की पुत्री का जन्म हुआ था.

ऐसे ही ब्रह्मा जी की मानस पुत्री अहल्या को उन्होंने गौतम ऋषि के साथ ब्याहा था, तो ऐसे ये और इसके आलावा अनेकोनेक मनष्यो ने अपने पुरुषार्थ से प्राप्त किया था देवलोक का भी ससुराल.

Share This Article:

facebook twitter google