लक्ष्मी जी की अवतार नहीं थी राधा जी, विष्णु के अवतार नहीं थे कृष्ण! जाने क्या है अंतर?

"जब राधा लक्ष्मी जी की अवतार है तो रुक्मणि कौन थी ये आपके मन में संशय आते होंगे ऐसे ही भगवान् कृष्ण जब विष्णु जी से सशरीर मिलने गए थे तो ये कैसे हो सकता था?जाने "

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पढ़कर अगर आपको बुरा लगा हो तो खेद है लेकिन ये प्रयास है आपके वैष्णवी ज्ञान को बढ़ाने मात्र का! ऐसे तो देवीपुराण में लिखा है की माँ दुर्गा ही कृष्णावतार थी और शिव जी ने राधा रूप धरा था लेकिन ये विचार शैव (शिव के आराध्यो का) है, लेकिन वैष्णवी शाश्त्रो में क्या लिखा है वो भी जानने योग्य है.

राधा और रुक्मणि दोनों ही समकालीन थी ऐसे में बहुत लोगो के मन में ये प्रश्न आता है की जब लक्ष्मी जी की अवतार रुक्मणि थी तो राधा जी कौन थी? ऐसे बाकि सभी 16107 रानियों के भी पूर्व जन्म की कथा श्रीमद भागवत महापुराण में है लेकिन राधा जी फिर कौन थी ये कैसे तय हो?

वेदवती और वृंदा राजा जनक की बेटी थी जो की दोनों ही भगवान् विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या करने लगी थी, दोनों को ही अगले जन्म में ऐसा होने का वरदान मिला था. तब सीता जी को राम मिले और वृंदा जो तुलसी बनी और शालिग्राम अवतार से उनका विवाह हुआ था.

तो क्या ये वृंदा ही राधा हुई या कोई और भी है स्वरुप....?


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उसी वृंदा के नाम से वृन्दावन नगर बसा था जिसमे तुलसी के बाग़ में हुआ था महारास जो की आज भी सुरक्षित है! लेकिन क्या वृंदा ही राधा हुई तो जवाब है नहीं, वृंदा असल में गोलोक की एक गोपी थी जी की श्रापित होकर पृथ्वी पर आई और तुलसी बन के अमर हो गई थी.

ऐसे ही कृष्णा को भगवान् विष्णु के दशावतार में से 8वा कहा जाता है लेकिन भगवान् विष्णु के तो अनंत अवतार है ये 10 प्रमुख अवतारों की कथा कैसे चली पता नहीं. श्रीमद भागवत में भी उनके अब तक 24 अवतार होने की बात कही है, लेकिन असल में भगवान् विष्णु और कृष्णा भले ही एक है लेकिन दो अलग अलग लोक के स्वामी है.


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असल में भगवान् कृष्ण और राधा तो आदि काल से ही गोलोक में अनित्य है और उन्होंने ही एक साथ पृथ्वी पर जन्म लिया था लीला करने के लिए. महाभारत के दौरान ही कृष्ण का अर्जुन को साथ लेकर भगवान् विष्णु से मिलने जाने का भी प्रसंग है जिसमे विष्णु जी ने कृष्ण जी को मिलने बुलाया था.

असल में कृष्ण का गोलोक भगवान् शिव की गौशाला हुआ करती थी, एक दिन उन्होंने अपने दांये काँधे पर अमृत रगड़ा जिससे कृष्ण प्रकट हुए जिनका गोलोक में शिव ने अभिषेक कर दिया और उन्हें अपना इष्ट बना लिया और खुद कैलाश पर चले गए जंहा दक्ष पुत्री सती से विवाह कर वो रहने लगे.

लेकिन कृष्ण ने अपने बांये अंग से दो भाग किये जिसमे से राधा और लक्ष्मी प्रकट हुई और और अपने बांये अंग से विष्णु को प्रकट किया जो की लक्ष्मी जी को लेकर वैकुण्ठ चले गए और संसार का सञ्चालन करने लगे. इन्ही लक्ष्मी ने रुक्मणि तो राधा ने राधा रूप धार पृथ्वी पर मनुष्यो को धन्य किया था.

राम जी विष्णु जी के सबसे बड़े अवतार थे तो कृष्ण स्वयं प्रकट होने से श्रेष्ठ हो गए...भूल चूक माफ़ करे

story sources : skand puraan, brahma vaivart puran & bhagwat puran

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