अजीबो गरीब वरदान मांगकर अमर होना चाहते थे कर्ण समेत ये दानव, जाने ऐसे ही कुछ मांगे गए वरदान?

"ब्राह्मण जी से ऐसे ऐसे वरदान मांग कर बहुत से दानवो ने प्रयास किया की वो अमर हो जाए लेकिन फिर भी उनका तोड़ निकाल ही लिया भगवान् ने, जाने ऐसे ही कुछ वरदानो को....."

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अपने भारतीय इतिहास (आध्यात्मिक) पढ़ा होगा जिसमे हम बहुत से राक्षसों द्वारा तपस्या कर वरदान प्राप्ति की बातें पढ़ते है. अपनी महत्वकांशा पूरी करने के लिए राक्षस हो या मानव अलग अलग तरह के अजीबो गरीब वरदान मांगते रहे है जिससे वो अमर होना चाहते थे लेकिन हो न सके, इन्ही में से एक था कर्ण!

अपने पिछले जन्म में कर्ण दम्भोद्भव नाम का असुर था जिसने तपस्या कर के ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया था पूछने पर अमरता का वरदान मांग लिया लेकिन वो तो किसी को नहीं दिया आज तक ब्रह्मा जी ने. तब उस असुर ने ये वरदान माँगा की मुझे मारने वाला खुद भी मर जाए.

ब्रह्मा जी ने वर दे दिया तो उस असुर ने अत्याचार शुरू कर दिए, तब उसका सामना हो गया नर और नारायण से जो की उसे मारने में सक्षम थे लेकिन दोनों में से एक को भी मरना पड़ता. लेकिन इसी कल्प पूरा हो गया और प्रलय आ गई जिसमे दम्भोद्भव मारा गया काल तो अमर था इसलिए उसे क्या हो सकता है लेकिन पूर्व जनम के तप से कर्ण को फल में मिला कर्ण जन्म.

जाने ऐसे ही कुछ अटपटे वरदान जिन्हे पाकर अवध्य हो गए लेकिन फिर भी भगवान् ने मार गिराया उन असुरो को


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राक्षस तारकासुर ने ब्रह्मा जी से वरदान माँगा था की उसका वध शिव पुत्र और केवल 7 दिवस का बालक ही करे, ऐसे में शिव के स्खलित तेज से मिटटी में रहकर पैदा हुए थे कार्तिकेय जो अण्ड के रूप में बड़े हुए और निकलते ही तुरंत बड़े हो गए और 7वे दिन ही उस असुर की इहलीला समाप्त कर दी थी.

रावण ने घमंड में चूर होकर कहा की सिर्फ वानर या मनुष्य के हाथो ही मारा जाऊं, हिरण्यकशयप का वरदान तो सभी को याद है ही. हयग्रीव नाम के दानव ने वर माँगा की कोई हयग्रीव ही उसे मारे तो भगवान् ने वैसा ही रूप ले उसे मारा, मधु कैटभ ने कहा की जंहा पृथ्वी जलमग्न हो वंही मारे जाए तो भगवान् ने उन्हें अपनी जांघो पर रख कर मारा.

महिषासुर ने कहा था की में स्त्री के हाथो मारा जाऊँ तो दुर्गा जी ने उसे मार दिया, रक्तबीज के खून की हर बून्द उसका बीज था तो काली उसका खून ही पी गई थी. अनलासुर कैसे भी नहीं मर सकता था तो गणेश उसे निगल गए, विरधा राक्षस का भी कुछ ऐसा था तो राम जी ने उसे ज़िंदा गाड़ कर मारा था.

तो कैसे भी वरदान मांग ले मृत्यु अटल है 

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