पुनर्जन्म : अयोध्या मथुरा जन्मस्थान और काशीविश्वनाथ तोड़े जाने पर इन 11 ब्राह्मणो ने किया था आत्मदाह

"गीता में जो भी लिखा है वो उदाहरण के साथ साक्षात् भी हुआ है, आक्रांता बाबर ने जब मथुरा अयोध्या जन्मस्थान और काशीविश्वनाथ को तोड़ वंहा मस्जिद बना दी तो 11 लोगो ने"

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आज अगर दिल्ली की जामा मस्जिद तोड़ दी जाए तो भारत ही नहीं दुनियाभर के मुसलमानो में कितना रोष होगा इसका आप अंदाजा लगा सकते है. राम मंदिर का मामला कोर्ट में है लेकिन इस्पे जब जब भी फैसला आया है पुरे देश में दंगे हुए है लेकिन जब पंद्रहवी सदी में बाबर (विदेशी आक्रांता) अयोध्या काशी और मथुरा के प्रमुख तीर्थ रोड रहा था तब कुछ नहीं हुआ था.

आज देश में सरकार वोट तंत्र की है इसलिए और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को जवाब देने के डर से भी हिंसक विरोध को भी दबाया नहीं जा सकता है. लेकिन तब (मुग़ल शासन काल में) तानाशाही चलती थी इसलिए बहुसंखयक होने के बाद भी हिन्दुओ ने विरोध नहीं किया और न ही किसी राजा ने ही इसपे कुछ किया.

हालाँकि महाराष्ट्र के कुछ राजाओ ने इसका विरोध किया था लेकिन संतोष जनक नहीं तो क्या उस समय की आबादी ने अपने तीर्थो के तोड़फोड़ पर कोई विरोध नहीं किया था? ब्राह्मण और राजपूत ही तब अग्रणी थे राजपूतो का तब एकमत नहीं था लेकिन काशी में रहने वाले एक ब्राह्मण और उसके 11 चलो ने जरूर क्षुब्ध होकर आत्मदाह कर लिया था.

तब वो ही 11 ब्राह्मण पुनर्जन्म लेकर आये थे बाबर के इस कुकर्म का जवाब देने....


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ये इतिहास हमारे पुराणों में से एक भविष्य पुराण में लिखा है, मुकुंद नाम का एक ब्राह्मण गुरु अपने आश्रम में रहता था बाबर द्वारा मथुरा काशी अयोध्या को तोड़कर वंहा मस्जिद बनाने से वो इतने क्षुब्ध हुए थे की उन्होंने अपने शिष्यों समेत आत्मदाह कर लिया था, फिर वो ही पुनर्जन्म लेकर आये थे.

अकबर और उसके नवरत्न ही उनमे से 10 थे, ग्यारहवीं मीरा बताई है है जिसने की गोपी भाव में (पूर्व जन्म में) कृष्ण की आराधना की थी और वो तब मीरा भाई हुई. गीता कहती है की मौत के समय मनुष्य जो भाव रखता है उसका भविष्य भी वैसा ही होता है और ऐसा ही हुआ भी.

बाबर ने जिस विश्वनाथ मंदिर और अयोध्या के राम मंदिर को तुड़वाया उसे अकबर ने फिर से मंदिर बनवा दिया था लेकिन उसके ही बोते औरंगजेब ने फिर वही किया जो की बाबर ने किया था. अकबर गंगाजल पिता था और उसका अग्नि संस्कार हुआ था (मौत के बाद किसी जाट राजा ने कब्र से कंकाल निकाल कर के किया था बदले के लिए).

गौर हो की अयोध्या राम जन्म, मथुरा कृष्ण जन्म स्थान और शिव का प्रमुख ज्योतिर्लिंग विश्वनाथ तीनो ही स्थानों पर अभी मस्जिद है अयोध्या में हालाँकि राम लल्ला विराजमान हो चुके है.

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