वाल्मीकि रामायण :पत्थर नहीं बनी थी अहल्या, अपनी गलती के लिए अदृश्य रूप में कर रही थी तपस्या!

"तुलसीदास जी की रामायण के अनुसार गौतम ऋषि की पत्नी अहल्या श्राप से पत्थर बन गई थी जो की राम जी के पैर स्पर्श के बाद फिर नारी बन गई थी लेकिन उसके बाद वो कहा गई..."

image sources :trendpickle

पढ़कर भले ही आप क्रोधित हो लेकिन जो सत्य है वो है, रामायण भारत की आत्मा है और इस ग्रन्थ को अब तक 300 लोग अलग अलग दृष्टिकोण से लिख चुके है इसलिए इनमे विरोधाभास होना स्वाभाविक है. वाल्मीकि रामायण घटित होने से पहले ही लिख दी गई थी जबकि तुलसीदास रामायण आज से करीब 500 सौ वर्षो पूर्व लिखी गई थी.

वाल्मीकि जी ने योगशक्ति द्वारा भविष्य में होने वाली रामायण देख कर लिखी थी रामायण लेकिन तुलसीदास जी ने शायद हनुमान जी से सुनकर उसके आधार पर लिखी हो? या फिर भुसुंडि जी ने जो गरुड़ को सुनाई थी उसके आधार पर क्योंकि उसमे शिव जी द्वारा पार्वती को सुनाने का वृतांत ही उन्होंने लिखा है.

इसी के चलते दोनों में विरोधाभास है जिसके चलते दोनों रामायण पढ़ने पर आपको एक ही घटना की अलग अलग तस्वीर समझ में आएगी. इसके पहले भी हम इन विरोधाभासो के बारे में आलेख लिख चुके है उसमे जो कुछ छूट गए थे वो अब इस आलेख में लिख दे रहे है.


image sources kidsgen

गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या तुलसी रामायण में जो घटा वो आप हम सब ने टीवी पर भी देखा था और लिखा भी ऐसा ही है लेकिन वाल्मीकि रामायण में उससे कुछ अलग लिखा है. उसके अनुसार अपनी भूल स्वीकार कर अहिल्या अपने ही आश्रम में अदृश्य रूप में तपस्या करने लगी थी पत्थर नहीं बनी थी.

गौतम ऋषि आश्रम छोड़ त्रयम्बकेश्वर रहने चले गए थे (नासिक के पास), उन्होंने ही कहा था की राम जी के दर्शन पाकर तुम अपराध मुक्त हो जाओगी. विश्वामित्र जी जब राम जी को अपने साथ ले जा रहे थे तब मार्ग में उन्हें एक सुनसान आश्रम दिखा जिसके बारे में पूछने पर उन्हें सब ज्ञात हुआ.

उनके उस आश्रम में कदम रखते ही वो आश्रम सजीव हो गया और अहिल्या जी प्रकट हो गई राम जी से आशीर्वाद लेकर वो बी पति के पास वापिस पहुँच गई और तब दोनों ने मिलकर ही की थी त्रयंबकेश्वर अर्द्ध ज्योतिर्लिंग की स्थापना.

Share This Article:

facebook twitter google