गांधारी और धृतराष्ट्र की प्रेम कहानी उदाहरण है भारतीय नारी के उच्च चरित्र की! जाने

"आज प्यार के नाम पर मर्द के लिए हवस और महिलाओ के लिए भोग विलास का लेनदेन चल रहा है लेकिन ग्रामीण इलाको में आज भी वन लाइफ वन वाइफ और हस्बैंड ही कायम है, गांधारी.."

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आज की पीढ़ी भले ही पति पत्नी को कितनी और किस किस तरह से ऐश करवाता है इसे ही प्यार मानते है पत्नी को कुछ करना नहीं होता है लेकिन असली प्यार वो ही है जिसमे दोनों की भागीदारी हो केवल सुख में ही नहीं बल्कि हर तरह के दुःख में भी दोनों बराबर के भागीदार हो.

करीना, करिश्मा हो या अमृता सिंह इन सभी अभिनेत्रियों ने प्यार को छोड़ कर पैसे को तवज्जो दी और इनमे दो का तलाक हो चूका है करीना भी झेल रही है दर्द. लेकिन भाग्यश्री जैसी अभिनेत्रियों ने जिन्होंने प्यार को तवज्जो दी वो आज सबसे ज्यादा सुखी और इज्जतदार है.

महाभारत में भी एक ऐसा ही उदाहरण है प्यार का जिसमे पति और पत्नी दोनों ने ही शादी हो जाने के बाद अपने प्रेम के रिश्ते को निभाया और दोनों ने उत्तम चरित्र (पति पत्नी) का दिखाया. द्रौपदी उदाहरण है आज की ग्रामीण भारतीय नारी का जो हरहाल में पति के साथ है और उसके आत्मसम्मान की रक्षा करती है चाहे वो कमजोर ही क्यों न हो.

जाने उनके रिश्ते के विषय में कुछ ऐसा ही अद्भुद....


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गांधारी के पिता ने अयोग्य होने के चलते हस्तिनापुर के राजकुमारों को अपनी पुत्री के स्वयंवर में आमंत्रित नहीं किया, इस अपमान का बदला लेने के लिए तलवार से ब्याह लाइ गई थी गांधारी (ध्रितराष्ट्र के लिए). लेकिन जब एक बार शादी हो गई तो गांधारी ने इस रिश्ते को स्वीकार किया, उन्हें बाद में मालूम चला की उनका पति अँधा है.

ऐसे में उन्होंने भी आंख पर पट्टी बाँध कर अंधत्व का जीवन ताउम्र जिया, अंधी बनकर भी उन्होंने पतिव्रत धर्म निभाया और एक धर्म धारिणी भी बनी. व्यास जी को प्रसन्न कर 101 सन्तानो की माँ भी बनी (पति से संतान नहीं हुई) पति के हर अच्छे बुरे में साथ रही यंहा तक की पति को साथ लेकर वनवास भी गई थी और उन्ही के साथ दावानल में देह त्याग भी किया था.

दुर्योधन को युद्ध में जाते समय आशीर्वाद दिया की जंहा धर्म हो उसी की विजय हो, अपने पुत्र को लोह का भी बनाया कृष्ण को भी अपने तपोबल से श्राप दिया वंश विनाश का. वंही भीम को भी पुत्र का खून पिने पर माफ़ कर दिया था कुंती के साथ कभी भी वैर नहीं रखा था अपने पति को उचित सलाह भी दी और पुत्रो को भी समझाया की पांडवो से बैर छोड़ दो.

द्रौपदी के श्राप से अपने वंश को भी बचाया था गांधारी ने, ऐसी नारिया आज भी भारतके गाँवो में घर घर में मिल जाएगी.

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