पांडवो का अंतिम वंशज था हेमू, मुगलो को उखाड़ फेंका था लेकिन....

"पांडव स्वर्गारोहण को चले गए परीक्षित को राजा बनाया उसका पुत्र जन्मेजय हुआ लेकिन उसके बाद क्या हुआ किसी को नहीं पता लेकिन भविष्य पुराण में जो लिखा है उसके अनुसार"

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विक्रमादित्य हेमू के नाम से भारत में मशहूर ये राजा कौन था कहा से आया था कोई नहीं जानता था न है लेकिन आदिल शाह सूरी का ये कभी सेनापति था. इसने सूरी के लिए 22 युद्ध जीते थे लेकिन पानीपत की दूसरी लड़ाई में वो दुर्घटना वश घायल हो गया और पकड़ा गया जिसके बाद बैरम खान ने उसका सर कलम कर दिया था.

लेकिन उसके पहले उसने उत्तरभारत में मुघलो को अधपतय करने से रोक दिया था, आदिल शाह की मौत के बाद वो खुद राजा बन गया था और उसने पुरे उत्तरभारत में अपना अधिपत्य स्थापित कर दिया था. उसे इसलिए अंतिम हिन्दू राजा (दिल्ली) का कहा जाता है और अब भी उसे काफी लोग पूजते है.

दिल्ली के युद्ध में अकबर को हराकर उसने अपने झंडे गाड़ दिए थे, उसका जन्म रेवाड़ी और मेवात के बिच कंही हुआ था लेकिन कोई भी इतिहास कार इसमें स्पष्ट नहीं है. लेकिन भर्ती शाश्त्रो में जो बात लिखी है उसके बारे में उसे जानकार आप शायद चौंक जायेंगे.


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श्रीमद भागवत महापुराण में पांडव वंश का वर्णन है जिसमे जन्मजेय द्वारा हस्तिनापुर छोड़ कंही और बस जाने की बात कही गई है. जी हाँ गंगा की बाढ़ में हस्तिनापुर दुब गया था तब पांडवो ने कौशाम्बी नगर बसाया जिसका अस्तित्व आज भी है और दिल्ली के किले के निचे उसी के अस्तित्व की सच्चाई भी कई लोग बताते है.

इसी वंश के नाश के बाढ़ हेमू ही उनका वंशज बचा था तो अचानक शक्तिशाली हो गया, हालाँकि शाश्त्रो में उसका नाम क्षेमु बताया गया है जो की लगभग एक ही है. शायद इसलिए उसे विक्रमादित्य की भी उपाधि थी उसके चाहने वाले ने आज भी कौशाम्भी और मेवात में उसके प्रति लोगो का सम्मान है.

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