तोते को देखते ही मिलता है पुण्य, जाने शाश्त्रोक्त किन किन को देखते ही मिलता है पुण्य?

"महाभारत में गीता प्रवचन के दौरान कृष्ण ने अर्जुन से कहा की संशय की स्तिथि में शाश्त्र ही प्रमाण है उसी शाश्त्र में लिखा है की तोते को देखते ही मिलता है पुण्य..."

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"तोता तोता संदेसा कहना...." फिल्मो में रोमांटिक गांव में तोते को प्रेम का सन्देश वाहक कह कर प्रचारित किया गया है, पक्षियों में से वो एकमात्र है जो की सिखाये जाने पर मनुष्य की भाषा बोल सकता है. कई लोग इसे पालते है और मिर्ची और चना दाल इसे खिलाते है पिंचरे में रखकर कैद करते है.

लेकिन क्या आप जानते है की तोता भी एक धार्मिक महत्त्व का पक्षी है जिसे देखने भर से ही देखने वाले को पुण्य की प्राप्ति होती है. वेदव्यास के पुत्र का नाम भी शुक देव था शुक का अर्थ तोता होता है और उनका धड़ भले ही मनुष्य का था लेकिन उनका सर भी तोते का था.

इसके अलावा शिव जी द्वारा कही गई अमर कथा भी एक तोते ने ही सुनी थी, एक तोते तोती द्वारा दिए गए श्राप के चलते ही माँ सीता को अपने पति का वियोग सहना पड़ा था. गरुड़ पुराण में लिखा है की तोते को देखने भर से ही पुण्य मिलता है, जाने ऐसे ही अन्य पक्षियों और वस्तुओ को जिन्हे देखने भर से ही पुण्य प्राप्त होता है!


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गरुड़ पुराण में ही तोते (शुक) के अलावा कहा गया है की मोर को देखने से भी पुण्य मिलता है, इसके अलावा गाय को देखने छूने से भी पुण्य मिलता है. गौमूत्र, गाय का ही घी, गोबर और दूध इन्हे देखने पर भी पुण्य मिलता है साथ ही गाय के पैर के निशान और उससे उड़ने वाली धूल को भी देखने से पुण्य मिलता है.

जैसे मुस्लिम सुवर को हराम कहते है वैसे ही सनातन में भी ये हराम ही है लेकिन ग्राम शुक्र (गांव में पाया जाने वाले सुवर) लेकिन अगर जंगली सुवर दिख जाए तो वो पुण्यदायी है. उसके पैर से खोदी गई मिटटी लगाकर स्नान करने से सभी तीर्थो में स्नान का फल मिलता है.

इसके आलावा शालिग्राम, देव प्रतिमाये, देव वृक्ष (पीपल, वट बरगद, बैल और तुलसी आदि आदि) को देखने पर से ही पुण्य मिलता है तो इन वस्तुओ के अपमान से बचे और उनके आसपास रह इनकी सेवा से और लाभ कमाए.

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