सप्तपुरी : आखिर क्या रहस्य है इन 7 भारतीय शहरों का?

"भारत अध्यात्म का शहर है और यंहा पर लोग जन्म से ही धार्मिक प्रवर्ति के होते है जो की कर्मो में आगा पीछा देखते है लेकिन इनमे 7 पुरियो की सबसे ज्यादा चर्चा होती है"

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क!शी, अयोध्या, मधुरा, हरिद्वार, कांचीपुरम, अवंतिका (उज्जैन) और द्वारका ये सप्तपुरिया यानि सात नगर कहे गए है! प्राचीन भारत में ये मान्यता रही थी की इन सात नगरों में जो भी अपने प्राण छोड़ता है उसे मोक्ष (सद्गति) मिलती है, लेकिन आधुनिक समय में लोग इसे कोरी अफवाह बताते है.

साथ ही कुछ लोग कई कहानिया जोड़ते है की, "नहीं ऐसा नहीं है, सभी को मोक्ष नहीं मिलता है" फ्ला फ्ला! लेकिन असल में सच्चाई क्या है, अगर शास्त्र ही शास्वत है या प्रमाण है तो शास्त्रों में क्या लिखा है तीर्थ मरण के विषय में? जाने आजा हमारे साथ.....

सबसे प्रमुख नगरी वाराणसी (वरुणा और असि नदी जिसकी रक्षा करती है) जिसमे स्वयं शिव कभी नहीं त्यागते इसलिए इसे अविमुक्त क्षेत्र कहते है. मान्यता है की यंहा प्राण छोड़ने वाले के कानो में स्वयं शिव मुक्ति का मंत्र फूंकते है और मनुष्य अपने कर्मो के फल भोगकर फिर मोक्ष पा जाता है.

जाने ऐसे ही बाकि 6 और पुरियो के भी महातम्य....


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श्री राम की जन्म भूमि होने के चलते अयोध्या पूरी तो अनुपम है, इसके आलावा भी बहुत से ऐसे तीर्थ मौजूद है जंहा का महत्त्व भी बहुत ज्यादा है. लेकिन वो भी ऐसे नहीं पहचान में आएंगे तो उनकी पहचान को कुंड और घाटों से ही समझा जा सकता है.

प्तचार घाट, इसी स्थान पर सीता राम समेत भरत शत्रुघ्न उनकी पत्निया और अयोध्या के सभी नगर वासियो ने जल समाधि लेते हुए साकेत धाम को गमन किया था. इस घाट में डुबकी लगाने वाला कभी यमपुरी का दर्शन नहीं करता है और भगवान् के ही धाम को अनंत पहुँचता है.

ऐसे ही लक्ष्मण जी का समाधी स्थल भी शेषनाग के मंदिर में है, जंहा राम सुबह दातुन करते थे भरत का नंदी ग्राम इन स्थानों की महिमा वर्णन नहीं की जा सकती है. ऐसे में इस नगर में मरने वाले को भी स्वयं शिव ही मोक्ष देते है क्योंकि राम जी उनके भी आराध्य है.


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कांचीपुरम भी सप्तपुरियों में शुमार है जिसमे रामेश्वरम भी शामिल है, ये स्थान शिव और पार्वती के प्रिय है जंहा आदि काल में दोनों ने लीलाये की थी. ऐसे ही कृष्ण जन्म और लीलाओ से परिपूर्ण होने के कहते मथुरा और द्वारका के भी महात्यम का वर्णन मुश्किल काम है.

महाकाल की नगरी अवंतिका (उज्जैन) में भी प्राण छोड़ने वाला मोक्ष ही पाता है इसके आलावा अंतिम नगरी हरिद्वार जिसे माया नगरी कहा है शाश्त्रो में भी ऐसे ऐसे तीर्थ है और यंहा ऐसी ऐसी लीलाये हो रखी है की वंहा पर पर प्राण छोड़ने वाले पर भी वो ही बात लागू होती है.

इसलिए अपने किसी निज जन को अगर डॉक्टर उतर देदे तो उसकी सद्गति चाग्ने वालो को तुरंत अपनी निकटस्थ सप्तपुरी पहुँच जाना चाहिए. अगर मार्ग में भी मृत्यु हो गई तो वो ही फल मिलेगा जो वंहा पहुँच कर मरने पर होता है...

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