अपनी अर्थव्यवस्था का 1/4 तो सिर्फ कर्जे का ब्याज ही चुकाता है भारत, जाने अपने अर्थ तंत्र को....

"रक्षा बजट भारत ने कम कर दिया, मनरेगा बंद कर दिया फला फला विपक्षी आरोप विपक्ष केंद्र सरकार पर लगाते रहता है लेकिन क्या अपने खुद इनकी जाँच की है, क्या मायने है इन"

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भारतीय अर्थव्यवस्था पर टीवी पर चर्चा होती है जो की आप सुनकर अगर किसी राजनितिक पार्टी से है तो अपने हिसाब से उसे आप गलत सही मानते है लेकिन अगर आप साधारण भारतीय है और इस सब बातो को नहीं समझते है तो थोड़ा वक्त दीजिये और समझिये अपने देश के अर्थ तंत्र को.

भारत सरकार हर साल किसी वित्तीय वर्ष के शुरू होने से पहले ही उसमे किये जाने वाले खर्चे तय करती है जिसका आधार उस साल की संभावित कमाई होता है. अगर इसमें खर्चे ज्यादा और आमदनी कम हो तो इसे फिस्कल डेफिसिट कहते है, साथ ही अगर आप ये जानेंगे की देश की कमाई कैसे होती है और खर्च कहा और कैसे होता है तो आप और भी जानकर होंगे.

असल में देश का बजट बनाने में ये ही कलाकारी होती है की आय पिछले साल के मुकाबले इस बार कितनी बढ़ेगी और खर्च कहा गैर जरुरी है जिसे समायोजित करा जाता है. आइये जाने भारत सरकार कैसे कमाती है पैसे कहा होते है खर्च और ये तय है की ये आंकड़े आपको चौंका देंगे.


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2017-18 में हमारा बजट 21.47 लाख करोड़ था जो 2018-19 में 24.42 लाख करोड़ हो गया यानि 10% पहले से ज्यादा. इसमें से लगभग 1/4 हमें विदेशो से लिए गए कर्ज पर ब्याज देने में लगाना पड़ता है, दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा हमें रक्षा में खर्च करना पड़ता है जो की लगभग 11% है, इसके आलावा एक रैंक एक पेंशन के लिए भी 7% व्यवस्था इसी बजट में सी की गई थी.

10% खाद्द्य और यूरिया सब्सिडी में खर्च किये जाते है मतलब आधा बजट तो ब्याज रक्षा और सब्सिटी में चला जाता है और बचे हुए आधे से देश का विकास किया जाता है. इसलिए सरकार RBI के पास पड़ा अतिरिक्त नकद भी मांग रही है साथ ही देश में जो बाहरी निवेश आता है उसकी कमाई भले ही देश से बाहर जाती हो लेकिन देश का बजट उससे बढ़ता है.

मतलब बिना ब्याज के पैसे से देश का विकास और रोजगार उत्पादन होता है जिसमे अभी भारत दुनिया में नंबर एक है. 


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भारत सरकार की कमाई में 1/3 हिस्सा GST का है इनकम टैक्स और कॉर्पोरेट (कम्पनियो से मिला टैक्स) लगभग आधा हिस्सा है तो बाकि कमाई एक्साइज और अन्य आय के स्त्रोतों से होती है. वर्ष 2019-20 में नोटेबंदी और GST के सुन्योजित होने से और भी बढ़ेगी और इस बार का बजट भी भारत का रिकॉर्ड होगा ये तय है.

भारत सरकार के कर्मचारियों और नेताओ की सैलरी और सुख सुविधाओं पर भी देश की कुल आय का 8% खर्च होता है जबकि भारत में सिर्फ सवा दो करोड़ ही केंद्रीय और राज्य स्तरीय सरकारी कर्मचारी है. डीजल पेट्रोल पर अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में भाव कम होने पर भी इसलिए ही सरकार ने कम नहीं किये की भारत की आमदनी बधाई जाए.
  
भारत हमेशा से ही ईमानदार देश रहा है लेकिन देश की आजादी के बाद नेता बेईमान हो गए और सेवा को धंधा बना लिया, जैसा राजा वैसी प्रजा इसलिए लोग भी उनके देखे ही भ्रस्ट हो गए. अब जब तक ईमानदार सरकार लम्बे अरसे तक रहकर इस संस्कृति को नहीं बदलेगी (कड़े फैसलों से) तब तक करप्शन खत्म नहीं होगा.

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