रक्तवर्ण शिव जी श्याम वर्ण पार्वती जी को मारते थे हास्य में ताने, गुस्साई उमा चली गई तप को

"क्या आप जानना नहीं चाहोगे इन सवालों के जवाब, महाभारत में है शिव पार्वती का ये अनूठा सवाल जिसमे जानकारी है शिव के विषय में! शादी से पहले नहीं शादी के बाद में एक "

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एक गृहस्थ परिवार के लिए उसके पुरखो के संस्कार ही मर्यादाये होती है जिसे वो नहीं लांघते है जो लांघते है वो मॉडर्न कहलाते है और जो उनपे कायम रहते है वो धार्मिक. एक राजा और आम नागरिक के लिए वैसे तो राम जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम बन मर्यादाये बनाई है लेकिन वो एक राजा भी थे.

पर उसके बावजूद भी वो आदर्श है लेकिन अगर एक आदर्श परिवार की मर्यादाये अगर किसी को सीखनी है तो वो सीखे महादेव से. उनके गले में नाग है जबकि उनके पुत्र कार्तिकेय का वाहन मोर है जो की परस्पर विपरीत है, ऐसे ही गणेश जी का वाहन भी चूहा है जो की नाग का निवाला है.

पार्वती जी का वाहन सिंह है जबकि शिव का वाहन नंदी है जो की परस्पर विपरीत है लेकिन फिर भी सभी एक ही परिवार में रहते है इसे कहते है परिवार के संस्कार. वैसे अगर आपको लगता है की भगवान् और आपका परिवार अलग अलग है तो आप गलत है, शिव पार्वती में भी होती है तीखी नोकझोक.

जाने एक अद्भुद प्रसंग दोनों पति पत्नी के बिच का....


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बहुत कम लोग जानते होंगे की ब्रह्मा जी के कहने पर रात्रि देवी ने मैना के गर्भ पर प्रसव पूर्व छाया डाल दी थी जिसके चलते उनकी पुत्री पार्वती जन्म से ही काली ही थी. हालाँकि उसके बावजूद वो सुन्दर थी, शिव जी से शादी हुई और दोनों की गृहस्थी चलने लगी थी.

ऐसे में दोनों में हास्य विनोद होता ही रहता है तब एक दिन शिव जी ने जब पार्वती जी उनसे गले मिली तो विनोद में कह दिया की तुम ऐसी प्रतीत हो रही हो जैसे पिले चंदन के पेड़ पर कोई नागिन लिपटी हो. पत्नी से कितनी ही छेड़छाड़ करो लेकिन मायके और उसकी सुंदरता पर मजाक भी किया तो बहुत भारी पड़ती है. 

पार्वती जी भी बहुत गुस्सा हो गई और वो तुरंत तपस्या के लिए चली गई थी, ब्रह्मा जी को प्रसन कर उन्होंने श्वेत रंग प्राप्त किया तभी शिव जी के पास लौटी थी. सिख ये ही ले की पार्वती जी तो सती थी इसलिए उन्होंने पति की शिकायत के मौके को दूर कर दिया लेकिन आम पति ऐसे व्यंग न करे और पत्नियों को प्रसन्न रखे क्योंकि.

पत्नी को प्रसन्न रखने के लिए बोला गया झूठ भी शाश्त्रो में पाप नहीं है...

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