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हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु के 52वे सगे भाई वज्रांग का पुत्र था तारक, 7 दिन का बालक ही कर सकता था वध

"हर कल्प (ब्रह्मा जी का दिन) की शुरुवात में पृथ्वी पर शुरू से सृष्टि होती है जिसमे ब्रह्मा जी सब की रचना करते है ये हमारा इतिहास है जिसे हम अध्यात्म कहते है पर.."
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जो व्यक्ति अपने इतिहास से नहीं सीखता है उसका भविष्य ही अंधकार मय होता है क्योंकि बिना इतिहास जाने भविष्य की नीव नहीं रखी जाती है. दुनिया भर के पास 2000 साल से पुराना इतिहास नहीं है लेकिन हमारे पार अरबो खरबो वर्षो का इतिहास है जिसे हम अध्यात्म कहते है.

हालाँकि जिनके पास इतिहास नहीं है वो हमारे इतिहास को कल्पित कथा कहते है लेकिन कम से कम कोई भारतीय तो ऐसा न कहे और समझे. हर कल्प (ब्रह्मा जी का दिन) के आदि में ब्रह्मा जी नींद से उठते है और फिर नविन सृष्टि करते है, अभी वो 50 वर्ष के हो चुके है और उनके वर्तमान साल का वराह कल्प चल रहा है.

इसी कल्प के आदि में जब सृष्टि हुई तो ब्रह्मा जी के शरीर से उत्पन्न हुए दक्ष की कन्याओ से कश्यप ऋषि का विवाह हुआ उनके हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु पैदा हुए थे जिनकी वराह और नरसिंघ भगवान् ने हत्या कर दी थी. उसके बाद दिति को पहले 49 मरुद्गण हुए और वो जब इंद्र के मित्र हो गए तो दिति ने फिर तपस्या की इंद्र के वध के लिए.

तब उनके गर्भ से वज्रांग पैदा हुए जो की महाप्रतापी थे लेकिन उन्होंने हिंसा छोड़ दी तब 


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तब वज्रांग को ब्रह्मा जी ने वरदान में तारकासुर नामक पुत्र दिया जो की अजेय था, उसने भी दादी दिति की इच्छा पूर्ति के लिए ब्रह्मा जी की तपस्या की थी और तब वरदान में उसने वर मांगा की मेरी मृत्यु महल 7 वर्ष के बालक के ही हाथो हो. तब तारक तत्काल अजेय और अमर बन गया था और त्रिलोकी झांप ली थी.

उसने भगवान् विष्णु तक को कैद कर लिया था जिन्हे बाद में ब्रह्मा जी की आज्ञा से छोड़ दिया था तब सृष्टि में पुनः सत्य का राज्य स्थापित करने के लिए शिव पार्वती से जन्म हुआ था कार्तिकेय का जिनके जन्म की कहानी बेहद दुर्लभ और पेचीदा है जिसे हम पहले बता चुके है.

लेकिन क्या आप जानते है की ये कार्तिकेय जी पहले शिव के ही गण थे और उन्हें पार्वती जी ने पुत्र का दर्जा दे रखा था...???


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मतस्य पुराण के अनुसार शिव पार्वती विवाह, स्कन्द जन्म, तारक जन्म और वध की कथा है जिसमे देवासुर संग्राम की भी कथा है. उसी में स्कन्द के जन्म से पहले पार्वती द्वारा शिव के एक गण पर मातृत्व बढ़ने की बात कही है जिसे उन्होंने अपना पुत्र घोषित कर दिया था.

लेकिन बाद में उन्होंने उन्हें कोई जिम्मेदारी दी थी जो की छल के चलते वो नहीं निभा सके थे और तब श्राप के चलते ही बाद में वो ही स्कन्द रूप में जन्मे और तारकासुर का वध किया था. लेकिन अगर आपको लगता है की 7 दिन में कैसे वो ये क्षमता प्राप्त की होगी तो ये आस्था का विषय है.

ऊपर वाले के लिए कुछ भी संभव नहीं है उनकी कृपा से सांप भी गरुड़ को खा सकता है...जय सियाराम 
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