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तो क्या राजा राम के पुत्र लव के वंश में जन्मे थे भगवान् बुद्ध, वेदव्यास जी थे उनके कुलगुरु?

"वेदव्यास जीने श्री कृष्ण के समकालीन ही वेद का व्यास कर के उससे चार वेद और 18 पुराण लिख दिए थे तब बुद्ध और कल्कि का जन्म हुआ नहीं था तो उन्होंने उनके बारे में..."
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image sources : boodhistoor

बौद्ध मान्यताओं के अनुसार नेपाल के लुम्बिनी में गौतम बुद्ध का जन्म हुआ और राजधानी कपिलवस्तु में उनका पालन पोषण हुआ था. फिर गया (बिहार) में उन्होंने ज्ञान प्राप्त किया और सारनाथ में पहला प्रवचन दिया था जिसके बाद उनकी कीर्ति फ़ैल गई और उनके अनुयाइयों की संख्या हजारो लाख में हो गई.

भगवान् विष्णु के इस कल्प में हुए 9 अवतारों में से 8वे कृष्ण थे और नौवे बुद्ध उन्हीसे बौद्ध धर्म बन गया है जो की भारत, श्रीलंका, म्यांमार, जापान, चीन, सिंगापूर, मलेशिया इंडोनेशिया, तिब्बत, कम्बोडिया, नेपाल, ताइवान, फिलीपीन थाईलैंड वियतनाम और साउथ कोरिया में फैला है, मतलब एशिया में ही ये प्रमुख रूप से प्रसारित. 

लेकिन उनका अलग धर्म क्यों बना और उनकी हिन्दुओ में पूजा आदि क्यों नहीं होती उनका इतिहास हम क्यों नहीं जानते कभी सोचा है? असल में वेदव्यास जी ने 5200 साल पहले वेदोका व्यास किया और शाश्त्र लिखे उस समय बुद्ध का जन्म नहीं हुआ था जबकि कृष्ण का हो चूका था इसलिए उनके बारे में सबसे विस्तार से हम जानते है.

लेकिन उनके विषय में सभी शास्त्रों में टुकड़ो में ही सही कुछ जानकारियों लिखी है जिसे हम साझा कर रहे है....


image sources : youtube

मतस्य पुराण में भगवान् राम के बाद के प्रमुख वंश लिखे है जिसमे कुश से नहीं बल्कि लव से आगे के प्रमुख राजाओ के नाम है उसमे ही बुद्ध भी शामिल है जो की अंतिम थे. वैसे लव लाहौर शहर में बसे थे लेकिन उनके पुत्र हो सकता है अपने ननिहाल में बस गए हो जैसे भरत पर अपने ननिहाल पक्ष का लगाव था.

बुद्ध का जन्म नेपाल मे हुआ जो की सीता जी का मायका है, वंही इसी (मतस्य) पुराण में वेदव्यास जी के उनके राजगुरु होने की भी बात कही गई है. हो भी सकता है क्योंकि बुद्ध विष्णु ने नौवे अवतार और वेदव्यास जी फिर उनके गुरु क्यों नहीं बनेंगे उनकी ही शिक्षा से उन्होंने बचपन में ही चैतन्य पाया और शांति का सन्देश दिया होगा.

एक और भी तर्क है, जंहा जंहा राम जी और विभीषण का राज्य (लंका) वंही बौद्ध धर्म फैला है भारत में भी पहले उसका ही बोलबाला था लेकिन पुष्कर से निकले चार राजवंशो ने वापिस सनातन संक्राति स्थापित कर दी जबकि बाहर के देश आज भी बौद्धिस्ट है.

उनके जन्म की पूरी कहानी पुराणों में नहीं लिखी है इसलिए इस बात का दावा नहीं किया है हमने सिर्फ कयास लगाए है...
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