फिल्मे जिनकी कहानी से नहीं बल्कि नाम से हुई बहुत बड़ी बहस, फिर लगा बेन भी...

"नाम में क्या रखा है? उत्तरप्रदेश में मुघलो के रखे नाम बदलने पर ये चर्चा हो रही है लेकिन सब तो नाम में ही रखा है कुछ बॉलीवुड फिल्मे तो सिर्फ नाम के चलतेही बेन हो"

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भारत में अभी कई शहरो के नाम बदले गए है या फिर बदले जाने प्रस्तावित है, ऐसे में विपक्षी पार्टिया भी मुद्दा बना रही है और कह रही है की नाम में क्या रखा है. लेकिन असल में नाम में ही सब कुछ नहीं तो काफी कुछ रखा है क्योंकि सरनेम के सहारे भारत में कई दुकाने चलती है.

आजादी के समय हिन्दू-मुस्लिम एकता ख़त्म थी तब नफरत से बचने के लिए सभी मुस्लिम सितारों ने अपने नाम बदल कर हिन्दू कर लिए थे. नेहरू जी के जमाई फ़िरोज़ ने अपना सरनेम Ghandy से बदल कर गाँधी (एमके गाँधी वाला) कर लिया था क्योंकि उन्हें उनसे प्रेरणा मिल रही थी.

इस तर्ज पर उन्होंने अपने बच्चो का नाम भी अपने धर्म से अलग रशीद और सईद नहीं बल्कि राजीव और संजय रखा था, इसलिए नाम में ही सबकुछ रखा है जी. ऐसे ही एक फिल्म पिछले साल आई थी (साउथ में) जो की गोवा फेस्टिवल में प्रदर्शित होनी थी लेकिन फिल्म का नाम विवादित था इसलिए फिल्म को प्रदर्शित ही नहीं होने दिया.

फिल्म का नाम हिन्दुओ की इष्ट देवी दुर्गा पर अश्लील शब्द के साथ रखा गया था निर्माताओं को बस पब्लिसिटी चाहिए थी फिल्म से नाम का कोई लेना देना ही नहीं था आखिर फिल्म फ्लॉप भी हुई और दिखाई भी नहीं गई...जाने ऐसी ही कॉन्ट्रोवर्सीज...


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फिल्म को फ्री की पब्लिसिटी के लिए पहले भी विवादित नामो बनाया जाता है जिसे बाद में बदल दिया जाता है, ऐसी ही एक फिल्म आई थी गोलियों की रासलीला. संजय लीला भंसाली विवादों से फिल्म को चर्चा में लाने के लिए वैसे ही बदनाम है ऐसे में एक अश्लील और हिंसक फिल्म को उन्होंने रामायण का ही एक नाम दिया.

तब विवादों में घिर गई थी फिल्म और नाम बदल कर गोलियों की रासलीला करना पड़ा था, हालाँकि इस फिल्म का नाम कहानी से प्रभावित था लेकिन वो नाम धार्मिक भावनाओ को आहत करने वाले थे....


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इसी साल कुछ महीने पहले रिलीज़ और फ्लॉप हुई सलमान के बहनोई की फिल्म लव यात्री के साथ भी ऐसा ही हुआ था, फिल्म का नाम तब बदलना पड़ा था. गुजरात में धार्मिक उत्सव से जुड़ा नाम रखने के लिए इसका विरोध हो रहा था जो की फिल्म के लिए नुक्सान दायक था.

लेकिन नाम बदलने का भी इसको कोई फायदा न मिला और फिल्म डिजास्टर फ्लॉप साबित हुई...


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राजपूत इतिहास पर बनी फिल्म जिसे संजय लीला भंसाली ने ही डायरेक्ट किया था मिले जुले बेन के बावजूद हिट रही थी लेकिन फिल्म का नाम बदला गया था. हालाँकि नाम बदलना ही काफी नहीं था लेकिन फिल्म को राष्ट्रिय पब्लिसिटी ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय पब्लिसिटी मिली जिससे फिल्म को फायदा हुआ.

हालाँकि फिल्म का नाम दिक्क्त नहीं था बल्कि दिक्क्त थी फिल्म की कहानी और भंसाली का ईगो....आशा है आगे भी ऐसे विवाद जारी रहेंगे क्योंकि अब समाज के ठेकेदार बढ़ गए है पहले सिर्फ एक ही तपके के थे... 

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