मृत्यु शैय्या पर लेटे लकवाग्रस्त मर्द में भी जाग जाता है क्रश, जाने इसके पीछे का आध्यात्मिक कारन???

"जब भी कोई लड़की देखि तबियत हुई हरी और ये हर मर्द की बीमारी है की वो पराई औरत को बिना देखे नहीं रह सकता है कुछ घूरते ही जाते है तो कुछ छुप छुप के घूरते है लेकिन.."

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हालाँकि ये तस्वीर दिल्ली विधान सभा की है जिसमे अलका लाम्बा के आने पर बाकि सभी विधायक उन्हें देख रहे है जिसमे मर्दो के अगर चेहरे के भावो को देखंगे तो पाएंगे के नौजवान हो या बुजुर्ग सभी के एक ही जैसे भाव है. भले ही आप इसकी आलोचना करे लेकिन इसमें मर्दो का कोई दोष नहीं है.

"Men will be Men" के एड्स से आप भले ही चुलबुला जाते है लेकिन इस हक़ीक़त से कोई भी मर्द मुकर नहीं सकता. वो लाख चाहे लेकिन जैसे ही कोई महिला आजु बाजू या सामने से गुजरेगी तो हर मर्द की नजर जाएगी ही जाएगी वो चाह कर भी अपनी इस आदत को बदल नहीं सकता है.

लेकिन क्या आप जानते है इसके पीछे वैज्ञानिक या यु कहे की आध्यात्मिक कारण क्या है? जी हां इसके पीछे भी एक आध्यात्मिक कारण है जो की बेहद जटिल है. अपने गौर किया होगा की अत्यधिक दुःख और सुख में मनुष्य को नींद नहीं आती है ये भी कुछ ऐसा ही है....

जाने विस्तार से एक जहां विषय को...


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अगर आपको लगता है की महिला की सुंदरता या पहनावे के चले मर्द ऐसा करते है तो ये भी गलत है ऊपर की तस्वीर में आप ये समझ सकते है. मर्दो की इस आदत का कपड़ो और दिखावट से कोई लेना देना नहीं है बल्कि ये एक प्राकर्तिक बात है जिसे नियंत्रण में हर कोई नहीं कर सकता है.

असल में मर्दो की आँखे देख कर भी कुछ देखती ही नहीं है, वो मन है जो महिलाओ को देखता है आँखें नहीं ऑंखें तो सिर्फ माध्यम है. 


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बिलकुल, हमारा मन ही हमारे शरीर का राजा है जो की 5 इन्द्रियों (कान, नाक, आँख, जीभ और त्वचा) से सभी भौतिक सुख भोगता है. कभी सुना है किसी अंधे बेहरे और गूंगे को प्यार हुआ है, जब आंखे किसी को देखेगी किसी के बारे में सुनेगी या आपके बोलने पर आपको कोई सुनेगा तब ही उसके मन में आपके प्रति कोई भाव होंगे अन्यथा नहीं.

जिसके हाथ में अपने ही औलाद की लाश हो उसके सामने कोई नंगी औरत आ जाए तो भी उसके मन में काम नहीं जगेगा क्योंकि मन तब दुःख  में डूबा होता है इसलिए न हमें तब भूख लगती है न प्यास. "मन के हारे हार है मन के हारे जित" आपने ये दोहा सुन ही रखा होगा जो की इसी सन्दर्भ में है.

अपने गौर किया होगा की आपकी नजरे अपनी माँ बहिन पर भी कुछ दिखने पर जाती है लेकिन बचपन से आपको समझाया गया है की ये अनैतिक है पाप है इसलिए अपने आप ही आपके मन में इन विचारो का दमन हो जाता है वंही अगर कोई पराई औरत या लड़की ताड़ने को मिल जाए जब आपको कोई न देख रहा हो तो आपका मन मौज लेना शुरू कर देता है.


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ऊपर की तस्वीर में इन दोनों ही मर्दो को नहीं पता की वो कैमरे की नजर में है अन्यथा वो अपनी नजरो को काबू में कर लेते, अनजान है इसलिए गुस्ताखियाँ चालू है आँखों की. इसमें भी मन के तीन अलग अलग गुण होते है सत, रज और तम गुण होते है मन के जिसमे से सत यानि सत्य गुण वाले मन के लोग बुरी नजर नहीं डालते है परायी औरतो पर नहीं ताड़ते है.

वंही रज गुण वाले मन है वो मौके बे मौके अपने मन को खुला छोड़ते है लेकिन मार्यता में रहकर या फिर इश्कबाजी के लिए ही. लेकिन जो तमोगुण के मन के लोग है वो अपने मन की करने के लिए बलात्कार भी कर गुजरते है बाद में परिणाम क्या होगा वो नहीं सोचते है.

लेकिन ये गुण मनुष्य के पुर्ज जन्म के कर्मो पर आधारित होते है इसलिए मनुष्य को पैदा होकर धर्म पर ही चलना चाहिए (जन्म की जाती के अनुसार शाश्त्रो में बताये काम ही करने चाहिए) तब अपने आप ही आप अच्छे बनेगे इस जन्म में तो जो है सो है कानून की सख्ती से ही ये नियंत्रण में आ सकते है या फिर बचाव ही उपचार है महिलाओ के लिए.

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