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भगवान् राम के बारे में ये बातें नहीं जानते होंगे आप, जानकर चौंक जायेंगे आप...

"इस बार और पिछली बार की दिवाली अयोध्या में खास हुई है जब से योगी सरकार आई है हो सकता है 2019 की दिवाली रामलल्ला तम्बू में न रहे और मोदी स्वयं आकर करे इसका उद्घाटन"
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धर्म धुरंधर जय श्री राम, जानकी वल्लभ सीताराम....भारत ही नहीं पूरी दुनिया के सम्माननीय भगवान् राम जो की विष्णु के 7  वे अवतार है की महिमा अपरम्पार है. हालाँकि उनको धरती पर लीला किये हुए 17 लाख साल बीत गए है (शाश्त्रो के अनुसार) और उनके बाद बुद्ध कृष्ण अवतार भी हो चुके है लेकिन फिर भी लोग राम जी के ही भक्त है.

हालाँकि भगवान् कृष्ण ने अपनी 111 साल की लीलाओ से ही भक्ति की ऐसी जोत जलाई की सब उनके दीवाने हो गए लेकिन फिर भी मर्यादा पुरुषोत्तम राम ही वैष्णो के सबसे बड़े ध्येय है. खुद भगवान् शंकर के भी इष्ट राम जी है तो हम आप क्यों न हो जाए दीवाने.

आपने रामायण देखि, सुनी और पढ़ी होगी लेकिन फिर भी राम जी को जानना समझना काफी मुश्किल है क्योंकि 11000 साल की लीलाओ को संक्षिप्त में जानना आसान नहीं है. इसलिए आज जाने राम जी के बारे में हम से कुछ ऐसी बातें जो आपको गदगद कर देगी....


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वाल्मीकि रामायण के अनुसार राम जी वनवास से कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को लौट आये थे, दिवाली के दिन उनका राज्याभिषेक हुआ था वो भी आधी रात में.

राम जी पिता दशरथ की तीसरी संतान थे, उनके पहले उनकी दो बहने पैदा हुई थी कौशल्या जी से शांता जो की ऋषिश्रृंगि से ब्याही गई थी और दूसरी संतान सुमित्रा से हुई एक और बहिन थी जिनका नाम नहीं बताया है स्कन्द पुराण में.

12 वर्ष की आयु में उनका विवाह सीता जी से हुआ था 24 की आयु में वो वनवास गए और 38 की उम्र में उनका राज्याभिषेक हुआ था. 

लगभग 40 साल की उम्र में वो कुशलव के पिता बने थे उसके बाद उन्होंने 11000 साल तक अश्वमेघ यज्ञ किये थे जिसमे सीता जी भी उनकी सहभागिनी थी.


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4-5 साल की उम्र में सीता जी को एक श्राप दिया था एक तोती ने जिसके चलते उन्हें कुशलव को वन में जाकर जन्म देना पड़ा था ऐसा पद्म पुराण के पाताल खंड में लिखा है. 

वाल्मीकि जी ने जब सीता जी की पवित्रता की शपथ ली तो अयोध्या वासियो ने राम जी से सीता जी को पुनः अपना लेने को कहा और राम जी ने वैसा ही किया था, मतलब रामायण की भी हैप्पी एंडिंग हुई थी.

राम जी की सुरक्षा के लिए उन्हें दशरथ जी ने गोकुल में भेज दिया था (रावण से बचाने के लिए) तब राम जी ने भी वंहा बाल लीलाये की और मरी हुई गायो को पुनर जीवित करवाने वो यमपुरी चले गए थे और जिन्दा करवा के ही माने थे.

भुशुण्डि रामायण में राम जी के मथुरा वृन्दावन और गोकुल में बाल लीलाओ का वर्णन है यंहा तक की रासलीला का भी वर्णन है.
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