क्षत्रियो का संहार करने की परशुराम प्रतिज्ञा पूर्ण करने के लिए मदद से जब दुर्गा ने रोक दिया था शिव जी को

"जमदग्नि पुत्र राम ने क्षत्रियो के 21 बार संहार की प्रतिज्ञा क्रोध में ले तो ली लेकिन उसका पूरा होना बिना देवकृपा के असंभव था तब उन्होंने शिव जी की तपस्या की पर"

image sources : quara

सहस्रबाहु के बारे में आप ने सुन ही रखा होगा जिसने रावण जैसे को भी अपने पराक्रम से परास्त कर दिया था, असल में वो भगवान् विष्णु के सुदर्शन चक्र के अवतार कहे गए थे. उनका राज्य भी संपन्न था लेकिन इसके बावजूद उनपे भी कभी तमो गन सवार हो गया था और उन्होंने ब्राह्मण जमदग्नि की गाय कामधेनु का जबरन हरण कर लिया था.

तब जमदग्नि के छोटे पुत्र राम (बाद में परशुराम बने) ने पराक्रम दिखाते हुए उसको मार दिया और अपनी गौ वापिस ले आये. लेकिन एक दिन उनकी गैर मौजुदगीमे सहस्रबाहु के वंशज राजकुमारों ने आश्रम पे हमला कर दिया और जमदग्नि की हत्या कर दी थी जिसके बाद राम का क्रोध प्रचंड हो गया.

परशुराम क्रोध से तिलमिला उठे और पिता के अंतिम संस्कार माँ के सती होने के पश्चात उन्होंने सहस्त्रबाहु के वंश का सर्वनाश कर दिया इतना ही नहीं उनका क्रोध जब शांत न हुआ तो उन्होंने क्षत्रियो के कुल का 21 बार संहार करने की भीषण प्रतिज्ञा की थी लेकिन वो  बिना शिव आशीर्वाद के पूर्ण होनी कठिन थी. 

उन्होंने तपस्या की शिव प्रसन्न हो वर देने को भी उद्धत हुए थे लेकिन तब क्षत्रियो की इष्ट माँ शक्ति ने शिव जी को ऐसा करने से रोक दिया....

Next Slide में पढ़ें : जाने आखिर तब कैसे परशुराम ने हासिल की अपनी प्रतिज्ञा पूर्ति के लिए शक्तिया
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