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1942 में इंग्लैंड के उपप्रधान मंत्री और 1945-51 के बिच प्रधानमंत्री ने बताया क्यों किया भारत को आजाद

"भारत छोडो आंदोलन विफल रहा गाँधी जी ने जेल में अनशन से आत्महत्या की कोशिश की सभी कांग्रेसी जेल में थे तो आखिर ऐसा क्या हो गया की अंग्रेजो ने मना करके भारत को...."
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image sources : thequint

जब द्वितीय विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजो ने भी नाजी विरोधी सेना से गठजोड़ कर लिया था तब उन्हें बड़ी सेना की दरकार थी और भारत में जनसँख्या अपार थी. ऐसे में उन्होंने भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस से जो की तब भारतीयों का अंग्रेजो की नजर में आधिकारिक रूप से प्रतिनिधित्व करती थी से उनकी सेना में इस बाबत भारतीय की भर्ती मांगी थी.

अंग्रेजो के पास तब लगभग सवा दो लाख की सेना थी जिसमे से 80% भारतीय थे, लेकिन कांग्रेस और महात्मा गांधी ने अंग्रेजो की इस मज़बूरी में आजादी का मौका देखा और भारतीय की भर्ती के बदले आजादी की मांग की. लेकिन अंग्रेजो ने कांग्रेस की इस मांग को खारिज कर दिया तब गाँधी जी ने भारत छोडो आंदोलन की शुरुवात की.

लेकिन इस दौरान भयंकर हिंसा हुई (भारतीयों के द्वारा) तब अंग्रेजो ने इसका दमन कर दिया और सभी कांग्रेसी मुख्य नेताओ को जेल में डाल दिया था. ऐसे में 1942 से 1946 के बिच कांग्रेस कुछ भी नहीं कर पाई और अचानक 1946 में अंग्रेजो ने भारत को आजादी देने की घोषणा कर दी.

तो ऐसे में सवाल ये है की जब 1942 में अंग्रेजो ने मना कर दिया था तो 1946 में बिना कांग्रेस के कैसे मान गई? जाने ब्रिटैन के तत्कालीन प्रधानमंत्री ने क्या दिया इस सवाल का जवाब....????


image sources : outlookindia

क्लेमेंट अत्तली 1942 से 1945 के बिच ब्रिटैन के उप प्रधानमंत्री थे जो की इंग्लैंड की हिस्ट्री में पहले डिप्टी पीएम हुए और 1946 से 1951 तक वो इंग्लैंड के प्रधानमंत्री रहे थे. उनसे ज्यादा बेहतर तरीके से कौन दे सकता है इस सवाल का जवाब लेकिन उनका कोई साक्षात्कार नहीं हुआ था.

लेकिन भारत के आजाद हो जाने के बाद वो जब पूर्व प्रधानमंत्री हो चुके थे तब वो बंगाल के दौरे पर आये थे और उस समय बंगाल (कोलकाता हाइ कोर्ट के चीफ जस्टिस) के तत्कालीन न्यायाधीश के गेस्ट हाउस में ठहरे थे तब उनसे PB चक्रवोर्ति ने ये सवाल पूछे थे जिनका उन्होंने कुछ ये जवाब दिया था.....


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ब्रिटैन के पूर्व पीएम ने तब जस्टिस चक्रवोर्ति को बताया की अंग्रेज सरकार की जड़ो को हिलाने का काम INA इंडियन नेशनल आर्मी यानी की आजाद हिन्द फ़ौज ने किया था. सुभाष चंद्र बोस बीमारी के बहाने से अपने घर में ही नजरबंदी में थे और इसी का फायदा उठाकर वो बर्मा भाग गए.

वंहा उन्होंने हारी हुई भारतीय राष्ट्रिय सेना को आजाद हिन्द फ़ौज में बदल दिया और नार्थईस्ट बर्मा लक्षयद्वीयो अंडमान निकोबार को अपने अधिपत्य में ले लिया था. इसी के चलते अंग्रेज भारत को सम्हाल नहीं पाएंगे अब ये सोचने पर मजबूर हो गए थे अगर बंगाल दुर्भिक्ष नहीं पड़ा होता तो शायद तभी बोस भारत को आजाद कर चुके होते (जापान में परमाणु हमले भी)!

आजाद हिन्द फ़ौज के बाद 1946 में एक और विद्रोह (गैर कांग्रेसी) हो गया जिसके चलते अंग्रेजो ने भारत को आजाद करने का फैसला लिया था...


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1946 में एक और ऐसा विद्रोह हुआ जिसने अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया, दूसरे विश्वयुद्ध के बाद अंग्रेज आजाद हिन्द फ़ौज के हजारो सैनिको को बंदी बनाकर भारत ले आये थे. लालकिले पर उनका सार्वजनिक कोर्ट मार्शल हो रहा था तब पूरा देश उबल गया था.

उसपे भी बॉम्बे तमिलनाड और जबलपुर नेवी में विद्रोह हो गया था हालाँकि ये विद्रोह सेना में जाती धर्म और रैंक के आधार पर हो रहे खाने और पगार को लेकर था लेकिन नेवी के लोग सड़को पर उतर आये अंग्रेजो को लेफ्ट हाथ से सलूट करने लगे थे. अंग्रेजो ने दमन किया दर्जनों भारतीय मरे अनशन शुरू हुआ जिसे पटेल ने मध्यस्थता से ख़त्म करवाया.

लेकिन तब अंग्रेजो ने वादा खिलाफी की और ये विद्रोह आजाद हिन्द फ़ौज के बंधकों के प्रति दुर्व्यवहार से जुड़ गया और तब अंग्रेजो को ये एहसास हो गया की भारतीय राष्ट्रिय सेना जो करीब 40 लाख थी के बल पर भारत पर राज सम्भव नहीं और इसी के चलते ब्रिटैन के प्रधानमंत्री ने भारत को आजादी का प्रस्ताव भेज दिया था.

भारत छोडो आंदोलन से कुछ फर्क नहीं पड़ा अंग्रेजो पर ये सवाल सुनकर ब्रिटिश पूर्व पीएम हंसने लगे थे....

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