कुम्भकरण ने एक विधवा राक्षशी को बलात्कार से कर दिया था गर्भवती, शत्रुघन ने किया था उसका...

"वाल्मीकि रामायण के अनुसार, विरध नाम के राक्षस ने दण्डकारयण की यात्रा के दौरान सीता जी को अगवा करना चाहा था (खाने के लिए), तब राम जी और लक्षमण जी ने किया था उसका"

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जन्म से राक्षश प्रवर्ति का था इसलिए मांस मदिरा व्यभिचार आदि आदि करता ही था कुम्भकर्ण लेकिन पिता से शिक्षा के आलावा उसने देवर्षि नारद से दर्शनशास्त्र की शिक्षा ली थी. उसके बल ऐश्वर्य से इंद्र भी जलता था इसलिए उसने धोखे से उसे इन्द्रासन दिलवा दिया था.

युद्ध में जब रावण ने उसे लड़ने के लिए जगवाया तो उसने रावण को भी खूब खरी खोटी सुनाई थी और पूरा दर्शन शाश्त्र का ज्ञान उड़ेल दिया था लेकिन विनाश काले विपरीत बुद्धि रावण कहा समझने वाला था. तब भी वो भाई के लिए युद्ध लड़ा और कहा की मरूंगा तो तुम्हारे लिए ही.

युद्ध के मैदान में भी उसने विभीषण का प्रणाम स्वीकार किया और उसके भाग्य को सराहा और उसे कहा की भाग्यशाली है जो राम की शरण में आ गया लेकिन में राम जी के हाथो मर के ही गति पाउँगा. हाँ लेकिन उसने युद्ध से पहले भी कुछ ऐसे अपराध किये थे जो की राक्षशी प्रवर्ति के थे. 

जाने उनके बारे में...


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रामायण के अनुसार राम वनवास के दौरान उनका सामना एक विरध नाम के राक्षस से हुआ था जिसने सीता जी को अगवा करना चाहा था (खाने के लिए), तब राम जी और लक्षमण जी ने किया था उसका वध. वो शस्त्रों से काट दिए जाने पर भी अवध्य था इसलिए उसे जमीन में गद्दा खोद के ज़िंदा दफना दिया था दोनों भाइयो ने.

विरध की पत्नी का नाम कर्कटी था जो की विधवा होने के बाद अपने मायके चली गई थी, रावण के भाई कुम्भकरण ने उसका बलात्कार किया था और उसी से उसको गर्भ ठहर गया था. कर्कटी के गर्भ से तब कुम्भकरण का नाजायज पुत्र भीम हुआ जो की अपने नाजायज पिता की मौत का बदला लेना चाहता था.


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जब सभी देवता भीम को न मार पाए (ब्रह्मा से हासिल किया था वरदान) तब एक शिव भक्त राजा ने किया था उससे मुकाबला, तब भीम ने उसे अपनी जेल में कैद कर लिया था. राजा ने जेल में मिटटी का शिवलिंग बनाकर उसकी पूजा की तो भीम ने उस शिवलिंग पर तलवार से प्रहार करना चाहा था.

तब शिव ने उसे भष्म कर दिया और राजा को अभी दे दिया, उसी भीम राक्षस के नाम से भीमाशंकर पड़ गया ज्योतिर्लिंग का नाम. वर्तमान महाराष्ट्र में पंचवटी थी जबकि अस्सम भी दण्डकारयण में तो नहीं आता लेकिन उसके पास ही था! चर्चाओं से और तर्कों से इस बात का फैसला होना चाहिए की असली ज्योतिर्लिंग कौनसा है न की विवाद से...

ऐसे अनंत उसका और कुम्भकर्ण के बीज का भी अंत हुआ था....

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