राजस्थान की भक्त कर्मा बाई ने 21 साल की उम्र में ले ली थी समाधि, जाने उनके बारे में...

"महाराष्ट्र संतो का राज्य है इसमें कोई दो राय नहीं है लेकिन राजस्थान में भी कुछ गैर ब्राह्मण भक्त हुए है जिन्होंने भक्ति धारा को नए आयाम दिए है जाने कर्मा बाई को"

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आप हम ने भले ही न सूना हो लेकिन राजस्थान के बच्चे बच्चे की जुबान पर मीरा के साथ साथ भक्त कर्मा बाई का भी नाम है. बचपन में ही अपने हाथो से भगवान् को खिचड़ी खिलाने वाली कर्मा के बारे में सभी और ज्यादा जाने ये हमारा आशय है क्योंकि उनके अंतिम समय के बारे में राजस्थानी भी कम ही जानते है.

आज से करीब 400 साल पहले राजस्थान के नागौर जिले की मकराना पंचायत के गाँव कालवा में जीवणमल डूडी के घर जन्म हुआ था कर्मा बाई का! कर्मा बाई के खिचड़ी के भोग की कथा तो सबने सुन रखी है लेकिन उसके बाद क्या हुआ ये आज जितना हमें पता है आप भी जाने.

लोग भगवान् को मानते तो है की हां भगवान् है लेकिन भगवान् में विश्वास अनन्य नहीं है, इसे मनोवैज्ञानिक तौर पर भी जाने तो ज्यादा अच्छा समझ आएगा. विज्ञानं कहता है की अगर किसी बच्चे को इस माहौल में पाले जिसमे उसे विश्वास हो जाए की वो दिवार के आरपार भी आ जा सकता है तो वो सच में ऐसा कर देगा.

असल में ये उस बच्चे की या विज्ञानं की नहीं बल्कि विश्वास की शक्ति है....


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कर्मा तब बच्ची ही थी जब उसने अपने हाथो से भगवान् को खिचड़ी खिलाई थी उसके बाद उनके पिता की मौत हो गई और उसने तब संन्यास ही ले लिया. तब वो तीर्थो में घूमने लगी और ऐसे ही एक दिन जगन्नाथपुरी (ओडिशा) पहुँच गई जंहा पर भी वो खिचड़ी बनाती और रोज मंदिर में जाकर भगवान् को खिलाती थी जिसे कोई और नहीं देख पाता था.

लोग उसे पागल समझते थे लेकिन वो उसकी भक्ति थी, जब जीवण पूरा होने वाला था तब कर्मा ने समाधि ले ली थी (स्थान अज्ञात)! उस दिन जगन्नाथ की मूर्ति में से आंसू निकल रहे थे, राजा को पता चला तो वो चिंतित था तब स्वप्न में भगवान् ने कर्मा की खिचड़ी न मिल पाने का दर्द कहा.

अगले दिन से राजा के आदेश पर जगन्नाथ पूरी में भी खिचड़ी का भोग लगने लगा जो की आज भी जारी है. नाभा जी भक्तमाल में उनकी कथा विस्तार से मिलेगी....जय श्री राम

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