सुपर स्टार बनने से पहले दक्षिण भारतीय फिल्मो के रणजीत थे रजनीकांत, अंधी लड़कियों से रेप...

"दक्षिण के भगवान् कहे जाने वाले थलाइवा रजनीकांत अब राजनीतिमे आ गए है लेकिन फिल्मे अभी भी जारी है लेकिन कम ही लोग जानते होंगे की शुरुवात में वो बॉलीवुड के रंजीत.."

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दक्षिण भारत में बड़े परदे के अभिनेता अगर सुपर हिट हो गए तो वो भगवान् का रूप से हो जाते है इसलिए ये लोग राजनीती में आकर भी उस दीवानगी को भुनाते है. नेताओ से ज्यादा अभिनेता प्रधान ही रही है दक्षिण भारत की राजनीती, इसी के चलते रजनीकांत भी आज वंहा भगवान का रूतबा रखते है.

उनकी हर फिल्म एडवांस बुकिंग और लगभत हिट ही रहती है इसलिए कहानी के चयन में भी ये स्टार्स कुछ ज्यादा ही संवेदनशील रहते है क्योंकि उनकी छवि का उन्हें भी ध्यान रखा पड़ता है यंहा तक के अपने निजी जीवन में भी इन्हे आदर्श पेश करना पड़ता है.

वैसे ही जैसे 1988 की रामायण में राम और सीता बने चरित्रों को बोल्ड फिल्म करने में हिचक और छोटे कपड़े पहनने में भी हिचक रहती थी वो लोग भी तब संसद एमएलए बने थे. लेकिन क्या आप जानते है की अपने करियर के शुरुवात में रजनीकांत बॉलीवुड के रणजीत सरीखे अभिनेता थे.

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अपने करियर की पहली ही फिल्म में रजनीकांत ने ऐसे पति का रोल किया था जो अपनी पत्नी को गालिया देता था और उसे प्रताड़ित करता था. राजनकी कान्त को तब ऐसे ही रोल मिलने लगे थे हालाँकि उनकी एक्टिंग की प्रसंसा भी होती थी और उनकी पहली फिल्म को कई नेशनल अवार्ड भी मिले.

अगली फिल्म में उन्होंने गाँव के एक दबंग गुंडे का रोल किया जिसमे वो एक अंधी महिला का उसके पति की अनुपस्तिथि में बलात्कार करते है. उनकी छवि शुरुवात में ऐसी थी जैसी बॉलीवुड के विलन रणजीत की थी लेकिन एक फिल्म में अच्छे रोल के चलते उनका करियर बदल गया और वो रातो रात सुपरस्टार बन गए.

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प्रेम पुजारी नाम की देवानंद की फिल्म में शत्रुघ्न ने पहली बार रोल किया तो एक पाकिस्तानी पुलिस अधिकारी का, उसके बाद प्यार ही प्यार, बनफूल, रामपुर का लक्षमण, भाई हो तो ऐसा, हीरा और ब्लैकमेल जैसे नकारात्मक रोल ही किये थे या ये ही उनके हिस्से आये.

लेकिन कालीचरण से उनकी ऐसी इमेज बदली और रीनो रॉय के साथ उनके प्रेम प्रसंग के चलते ऐसी हवा बदली की लगातार एक ही जोड़ी और जोरदार हिट से वो खामोश अवतार सुपर स्टार बन गए.


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पढ़ाई पूरी होती है सुनील दत्त ने उन्हें देखा और मन का मीत से उन्हें बॉलीवुड का सदस्य बना लिया था, फिल्म में उनका रोल एक खलनायक का था. बाद में पूरब पश्चिम, सच्चा झूठा, आन मिलो सजना, मस्ताना, एलान और मेरा गाओं मेरा देश तक तो उन्होंने नकारात्मक भूमिकाये ही की लेकिन ....

1971 में उन्हें गुलजार का साथ मिला और कुछ फिल्मोमें सकारात्मक रोल किये अमर अकबर अन्थोनी और मुकद्दर का सिकंदर से उन्हें हीरो का रुतबा मिला और उसके बाद तो वो ही हीरो बन गए. 

है न अजीब चला मुरारी हीरो बनने लेकिन विलन बन गए लेकिन डेस्टिनी उन्हें वापस ले ही आई अपने करियर के शीर्ष पर.

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