विधवा विवाह बॉलीवुड में सफलता का सुपरहिट फार्मूला है, जाने दमदार कहानिया और सफलता

"कभी वक्त था एक आम हिंदुस्तानी महिला घूंघट में रहती थी पढाई बहुत कम कराई जाती थी या 10वी बहुत जोरमार के कराई जाती थी. आम सभाओ में महिलाये अपने ही जत्थे में रहती "

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पुराने भारत में विधवा विवाह का कोई प्रावधान नहीं था और न ही पुनर विवाह का, पत्नी अगर कुलटा (कलह कारी या दुश्चरित्र) तो पति उसे, उसके मायके या बच्चो के सहारे अपनी आजीविका का एक तिहाई देकर छोड़ सकता था और अगर वो संन्यास नहीं ले रहा है तो दूसरी शादी कर सकता था महिला नहीं.

ऐसे ही विधवाओं के लिए भी पति व्रत के जैसे विधवा व्रत होता था, सती प्रथा थी लेकिन वो स्वैच्छिक थी जबरन नहीं जब लोगो ने जबरदस्ती की तो अंग्रेजो ने इसे प्रतिबंधित कर दिया. ऐसे ही विधवा व्रत को लोगो ने जबरन कड़ाई से लागू करना शुरू कर दिया और विधवाओं का प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था.

इसी ज्वलंत मुद्दी पर तो पाश्चात्य संस्कृति के बॉलीवुड ने जिम्मा सम्हाला और शुरू की विधवा विवाह पर फिल्मे बनानी, जो कुरीति थी उसे ही धंधा बना लिया बॉलीवुड ने और सभी फिल्मे रही थी सुपर हिट. आज जाने कुछ ऐसी ही बेहतरीन फिल्मो के बारे में जिसमे समाज से उलट दिखाया लेकिन रही सुपर हिट.


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फिल्म "तेरी मेहरबानियाँ" तो आपको याद ही होगी जिसमे जैकी श्रॉफ पूनम ढिल्लों ने बेहतरीन अभिनय किया था लेकिन फिल्म में फेम ले गया कुत्ता. फिल्म में कुत्ते की वफ़ादारी और मालिक के बदले लेने के लिए खूब प्रसंसा हुई और आज भी फिल्म की सफलता की मिसाल रहती है हर जानवर पर बनने वाली फिल्म पर.

लेकिन फिल्म में ठाकुर की विधवा बहु से उनके ही नौकर द्वारा किया गया विधवा विवाह भी सुर्खियों में रहा था वो कंटेंट भी फिल्म की सफलता में बड़ा रोल था.


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अनिल कपूर अभिनीत फिल्म ईश्वर तो उनके अभिनय का बेहतरीन नमूना था जिसमे उन्होंने एक मंद बुद्धि मर्द की भूमिका निभाई थी. इसी भोलेपन के चलते वो एक विधवा और एक बच्चे की माँ के मांग में सिंदूर भर के आलोचना का शिकार होता है लेकिन पीछे नहीं हटता है.

अनंत विधवा उसे अपने पति के रूप में अपनाती है और वो पति उसके दुःख सुख का साथी बन जाता है.


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"प्रेम रोग" को कौन भूल सकता है जो की एक विधवा ही नहीं बल्कि ठाकुर खानदान की विधवा के पुनर्विवाह की कहानी है जो की राजकपूर की बेस्ट फिल्मो में से एक है या यु कहे बेस्ट ही थी. पद्मिनी का विवाह और सुहागरात से पहले ही पति की मौत हो जाती है और फिर जेठ द्वारा रेप.

बाद में बड़े संघर्ष के बाद प्रेमी से पुनर्विवाह होता है...


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फिल्म कटी पतंग तो राजेश खन्ना की सबसे बेस्ट फिल्मो में से एक थी, फिल्म में आशा पारेख विधवा नहीं थी लेकिन शादी शुदा मर्द से शादी के चलते वो उसे छोड़ आती है. तब सहेली जो की विधवा है के गाँव जाते समय सहेली मर जाती है और वो उसके घर चली जाती है.

जंहा राजेश खन्ना से प्यार और अनंत शादी हो जाती है...


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फिल्म सिलसिला तो सबसे रिस्की फिल्म थी लेकिन सर्वकालीन हिट फिल्मो में से एक थी, फिल्ममे अमिताभ को अपनी प्रेमका रेखा को छोड़ मज़बूरी में अपने भाई की गर्भवती विधवा जया से विवाह करना पड़ता है. दुर्घटना में बच्चा मर जाता है तो शादी शुदा एक्स गर्लफ्रेंड रेखा से फिर नजदीकियां बढ़ने लगती है.

अनंत जया अमिताभ के बच्चे से गर्भवती हो जाती है और उधर रेखा का भी पति संजीव से प्यार हो जाता ही है. 

इसके आलावा 1964 में आई फिल्म इशारा भी खूब थी जिसमे अपनी बेटी को हॉस्टल भेज विधवा माँ दूसरी शादी कर लेती है और फिल्म इसी ताने बाने में हिट भी रहती है. तो ये बॉलीवुड में हिट फार्मूला है इसके आलावा जब भी शाहरुख़ मुस्लिम बने फिल्म हिट रही है. तो बॉलीवुड फिल्म मेकर्स इनपे काम करो...

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