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जाने सती पुत्र गणेश के जन्म की रोचक कथा, शनि इसलिए आज भी रखते है नीची नजरे

"सुनकर ही शायद आप चौंक गए होंगे क्योंकि अपने भी बाकि सनातनियो के जैसे ब्रह्मा वैवर्त पुराण नहीं पढ़ा होगा, कंही इंटरनेट पर भी ये सच नहीं पाई होगी क्योंकि वंहा भी "
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image sources : youtube

दुनिया के पास 5000 साल से पुराना लिखित इतिहास नहीं है इसलिए वो स्वीकार करते है की काशी ही सबसे पुरानी बसी हुई नगरी है लेकिन काशी कितनी पुरानी है वो किसी को नहीं पता क्योंकि उसका न आदि है और न ही अंत. जितना पुराना भारत का इतिहास है उसे देख का विदेशी इसे कल्पना समझ कर इसे कल्पित कथा (माइथोलॉजी) नाम दे रखे है.

इतिहास तो हमारे पास भी जो की अनंत है जिसे 5200 साल पहले व्यास जी ने शाश्त्रो और वेदो के रूप में लिखा था! ब्रह्मा जी का एक दिन रात ही जब धरती के साढ़े आठ अरब वर्षो का है तो भला इतना पुराना इतिहास विस्तार में लिखना सम्भव कैसे हो सकता है आप ही बताइये.

जाने लाखो वर्षो पहले हुए सती पुत्र गणेश जन्म की अद्भुद कथा, शिव सती का विवाह हुआ था लेकिन सती कभी गर्भ धारण न कर पाई. तब शिव के कहने पर उन्होंने भगवान् विष्णु की प्रसन्नता के लिए अनुष्ठान किया जिसमे विष्णु प्रसन्न हुए और उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा.

तब सती ने विष्णु जी को ही अपने पुत्र रूप में पाने का वरदान मांग लिया था...


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भगवान् ने तथास्तु कहा और उनका अनुष्ठान पूरा होने पर भिक्षा मांगने द्वार पर आये जब सती ने भिक्षा दी और लौटी तो उनकी शैया पर भगवान् विष्णु बालरूप में खेल रहे थे. सती को वरदान रूप में भगवान् विष्णु पुत्र रूप में मिले जो की इतने सुन्दर थे की उसे देख सब चकित थे.

एक दिन शनि महाराज कैलाश पर पहुंचे (सती से मिलने) लेकिन वो दृष्टि निचे किए ही रहते थे ये बात सती को चुभ गई और उन्होंने शनि से अपने पुत्र पर दृष्टि डालने को कहा. शनि ने कोप से बचने के लिए ऐसा किया और उनके गणेश पर दृष्टि डालने भर से ही बालक का सर धड़ से अलग हो गया.


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तब सती ने विलाप आरम्भ कर दिया और देखते ही देखते वंहा सभी देवता जमा हो गए और शनि को कोसने लगे. अनंत सभी ने मिलकर गणेश को पुनः जीवित करने की बात कही और प्रयास किया की वो जीवित हो जाए, तब पशुपति नाथ शिव ने हाथी के बचे के सर से उस बालक को जीवित कर दिया.


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पार्वती पुत्र गणेश के जन्म की कथा तो सभी को कंठस्थ हो ही गई होगी लेकिन ये भी जान ले की हर कल्प में भगवान् विष्णु शिव शक्ति के पुत्र के रूप में प्रकट होते है और असुरो का संघार करते है.
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