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सनातन परम्पराओ को आज भी बचाये हुए है दक्षिण भारत, जाने गर्व करने लायक फैक्ट्स!

"शाश्त्रो का लेख है धर्मो रक्षति रक्षिताय अर्थात अगर आप अपने धर्म की रक्षा करोगे तो ही धर्म आपकी रक्षा करेगा, परवश हुई द्रौपदी की लाज कृष्ण ने इसलिए ही बचाई थी.."
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"धर्मो रक्षति रक्षिताय" अर्थात अपने वर्ण धर्म की रक्षा करो तो धर्म तुम्हारी रक्षा करेगा! द्रौपदी ने अपने पतिव्रत धर्म का पालन किया तो भगवान् ने उसका चीर हरण नहीं होने दिया था! महाभारत के युद्ध कर्ण जब मुसीबत में फंस मारा जाने वाला था तब उसने धर्म पर सवाल उठाये थे तब कृष्ण ने उसे कहा की सिर्फ दान करना ही धर्म नहीं तू अधर्मी है इसलिए धर्म नहीं बचाएगा.

रजनीकांत के बेटी को हालाँकि काफी अरसा हो गया लेकिन उनकी बेटी के विवाह की तस्वीर देखकर आप सोच में न पड़ जाये इसलिए सीता जी का जनक द्वारा कन्यादान करने की तस्वीर भी देख ले. सीता जी की उम्र तब मात्र 6 वर्ष थी, अब हलाकि बाल विवाह गैर क़ानूनी है इसलिए अपनी बालिग बेटी को रजनीकांत गोद में बिठा कर उसके पति को सौंप रहे है.

युग की बात है, त्रेतायुग में 4 वर्ष की उम्र में ही विवेक आ जाता था इंसानो में और कलियुग में तो जिंदगी निकल जाती है तो भी नहीं आता. हालाँकि उतर भारत में अपने ऐसा दृश्य नहीं देखा होगा, क्योंकि यंहा विदेशी अक्रान्ताओ ने खूब अत्याचार किये थे साउथ में आज भी काफी हद तक जिन्दा है सनातन संस्कृति.

जाने कौन कौन से शास्त्रीय कर्म करता है दक्षिण भारत का समुदाय...


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शाश्त्र का निर्देश है की लोहे के बर्तन में और लोहे के पात्र में बना भोजन अभक्ष्य है, अपने अगर किसी साउथ फिल्म में भोजन बनते या शादी में गौर किया हो तो पाया होगा की वंहा व्यंजन पीतल या एल्युमीनियम के पात्रो में ही पकाया जाता है और पीतल के पात्रो में ही खाया जाता है.

कोई धनि है तो चांदी के बर्तनो में भोजन करता है, हालाँकि हम लोग आज पैसे वाले होकर भी लोहे (स्टील) के बर्तनो में खा रहे है जो की मांस तुल्य ही है समझो. 


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दक्षिण भारत में बच्चे के जन्म के समय नाल काटने से पहले उसे स्वर्ण छुआकर गाय का घी चटाया जाता है वेदमंत्रों की ध्वनि में, 10 वे दिन नामकरण और एक महीने में ही जलुआ पूजन. 3 महीने पर बच्चा जब करवट लेता है तो उत्स्व पहली बार घर से बाहर निकालने पर भी उत्सव मनाया जाता है.

6 महीने का होने पर अन्न प्रश्न (पहली बार अन्न खिलाना) एक साल के भीतर भीतर तीर्थो में उसका मुंडन! 8 वर्ष का होते ही उसे उपनयन करवाकर ब्रह्मचर्य में लगा दिया जाता है तो (अगर ब्राह्मण है तो) मतलब सभी संस्कार समय से और तरीके से किये जाते है जो की दुर्लभ है.

हालाँकि पेरियार के नेतृत्व और उसके पहले जो ब्राह्मण विरोधी दंगे हुए थे उस समय वंहा से ब्राह्मणो को भगा दिया गया था या प्रताड़ित किया गया था. वो बाद में महाराष्ट्र आ गए तो यंहा भी ठाकरे ने उनकी के विरोध से अपनी राजनितिक करियर की शुरुवात की और महारास्त्र राजनीती में जननायक बन गए.
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