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जाने किसने की थी पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर की स्थापना, केदार जब बंद होता है तो 4 महीने यंही रहते है शिव

"पुष्कर का नाम तो सभी ने सुना है बहुत से वंहा गए स्नान दर्शन भी किये है लेकिन क्या कोई जानता है की पुष्कर मंदिर की स्थापना किसने की थी, कभी चमत्कार राजा ने बसाया"
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image sources :mygodpicture

तीर्थराज पुष्कर का नाम सबने सूना है, दर्शन-स्नान भी बहुतो ने किये है लेकिन क्या कोई बता सकता है पुष्कर तीर्थ में ब्रह्मा जी के मंदिर की स्थापना किसने की थी? राजस्थान में स्तिथ ये तीर्थ तीर्थ राज कहलाता है, हालाँकि औरंगजेब के अत्याचारों से ये भी नहीं बच सका फिर भी कमोबेश अस्तित्व में तो है.

अजमेर जिसे से कुछ ही किलोमीटर पर स्तिथ ये तीर्थ श्रद्धालुओं का गढ़ है, यंहा साल पर में करोडो लोग तीर्थ करने आते है. बलि से तीन पग भूमि लेते समय धरती पर अपना पाँव वामन जी ने जंहा रखा था वो स्थान पुष्कर ही था इसलिए यंहा पर विष्णुपदी नाम का तीर्थ है.

सप्तऋषियों का आश्रम, अगस्त्य का आश्रम यही पर था! कपिल ऋषि ने यही पर पाई थी सिद्धिया. मेनका ने इन्ही सरोवर में अप्सरा पद पाया था, एक शिकारी के तीर से घायल होकर एक हिरणी इस सरोवर में कुड़ी और मर के अप्सरा के रूप में स्वर्ग में प्रतिष्ठित हुई थी.

लेकिन पुष्कर में ब्रह्मा मंदिर बनवाया या स्थापित किसने करवाया...


image sources :swantourwordpress

पुष्कर का नाम पहले हाटकेश्वरक्षेत्र और चमत्कारपुर हुआ करता था, ये शिव जी की प्रिय नगरी थी इसलिए राजा चमत्कार ने इसे बनाया था और ये चमत्कारपुर कहलाती थी. ब्रह्मलोक की सरस्वती को धरती पर भेजने के लिए ब्रह्मा जी ने अपना कमल फेंका जो की वंही तीन स्थानों पर एक एक करके उच्छला था.

इन तीन स्थानों पर ही त्रिदेवो के तीर्थ बन गए थे और नगर का नाम तब पुष्कर के चलते पुष्कर पड़ गया, अब जाने किसने बनाया था ब्रह्मा मंदिर?


image sources :wikipedia

हर हर महादेव, ऋषि मरकंडू के पुत्र जिन्होंने शिव जी से अमरत्व प्राप्त किया था मार्कण्डेय जी ने ही ब्रह्मा जी के मंदिर की स्थापना की थी. मार्कण्डेय जी का जन्म भी पुष्कर राज में ही हुआ था और यंहा से काशी जाकर उन्होंने अमरत्व पाया था फिर पिता के पास लौटे और बनाया था ब्रह्मा मंदिर.

पुष्कर में अचलेश्वर नाम से शिव का पवित्र स्थान है, 2 किमी की दुरी पर मणिबंध शक्तिपीठ है जंहा शक्ति की कलाई गिरी थी. विष्णुपदी का पुत्र ज्ञान नहीं है लेकिन यंहा रंगनाथ मंदिर है जिसका निर्माण सम्भवतः राम जी ने करवाया था, यंहा मंदिर की संख्या गिनती करना असंभव है कभी जाए तो गाइड लेकर करे पूर्ण तीर्थ यात्रा.

story sources :skandpuran
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