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असुरो के संघार के लिए शिव ने धारण किया था भैंसे का रूप, जाने केदारनाथ की कथा...

"अभी श्रावण चल रहा है और भले ही बारिश और आपदाये हो लेकिन केदारनाथ में भीड़ अपरम्पार है, वैसे तो माँ दुर्गा ने महिषरूपी असुर का संहार किया था लेकिन कभी शिव ने भी.."
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image sources : youtube

श्रावण महिने मे शिव मंदिरो में अपार भीड़ उमड़ती है लेकिन शिव जी के 12 ज्योतिर्लिंगों में तो साल भर ही शिवरात्रि ही रहती है. इन्ही ज्योतिर्लिंगों में से एक है केदारनाथ ज्योतिर्लिंग जो की चारधाम की यात्रा में से एक बद्रीनाथ के साथ ही दर्शन के लिए उपलब्ध होता है.

दोनों ही मंदिर सर्दियों के चार महीनो के लिए बंद हो जाते है, इन चार महीनो के दौरान शिव और भगवान् विष्णु धरती पर कंही अन्यंत्र ही निवास करते है. बद्रीनाथ की कथा तो हम आपको पहले भी बता चुके है लेकिन क्या आप केदारनाथ धाम की स्थापना और नामकरण के बारे में भी जानते है कुछ?

किसने की थी स्थापना, नामकरण के पीछे है क्या तात्पर्य और क्या होता है महत्त्व कुंड विशेष में नहाकर दर्शन करने का फ्ला फ्ला? आज जाने केदारनाथ के नाम करण समेत सभी तत्व, यंहा असुरो के संघार के लिए शिव ने धारण किया था भैंसे का रूप, जाने केदारनाथ की कथा...


image sources :Hindugod

एक समय की बात है, हिरण्याक्ष नाम के एक राक्षस और उसके 4 और राक्षशो ने त्रिलोकी पर राज स्थापित कर लिया था और इंद्र को अपदस्त कर लिया था. तब सत्ता वापसी के लिए इंद्र ने ब्रह्मा जी से याचना की तब उन्होंने उसे धरती पर उत्तराखंड जैसे देव क्षेत्र में तपस्या करने को कहा.

इंद्र ने तब घोर तप किया, पहले एक वक्त फलाहार फिर पानी पर तो फिर सूखे पतों पर और अनंत वायु पीकर शिव जी की तपस्या की और तब....


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तब वंहा शिव जी महिष (भैंसे) के रूप में प्रकट हुए और कहा "के दरियामि" मतलब किसको मारु, तब इंद्र ने अपनी समस्या बताई और भारी युद्ध के बाद महिष रूपी शिव ने उन पांच असुरो का संहार कर दिया.

तब इंद्र ने भगवान् शिव से कहा की आप इन्ही विराजित हो जाइये, के दरियामि कहने के चलते इंद्र ने इस स्थान का नाम केदार नाथ रख दिया. आज भी इंद्र हर रोज यंहा स्वर्ग से शिव की उपासना करने आते है. वंही स्तिथ एक कुंड में वो स्नान करते है जिसके बाद दर्शन करने पर ही यात्रा का पूर्ण फल मिलता है.

शिव इंद्र को प्रत्यक्ष दर्शन भी देते है, लेकिन सर्दी में जब इंद्र को शिव के दर्शन नहीं हुए तो आकाशवाणी से शिव ने बताया की इन चार महीनो में में चमत्कारपुर/हाटकेश्वर क्षेत्र यानी पुष्कर में निवास करता हु तो इन सर्दी के चार महीनो में शिव की पूजा करने के लिए इंद्र पुष्कर जाते है वंहा भी शिव का बड़ा तीर्थ है.

story sources :skandpuran
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